नन्हीं चिड़ियाओं की सेवा को मानते है यज्ञ

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किशनगढ़ के पंडित रतन शास्त्री के घर में पलती हैं चिड़ियाएं

सत्येन्द्र शर्मा

मदनगंज-किशनगढ़. अजमेर जिले में किशनगढ़ के पंडित रतन शास्त्री नन्हीं चिड़ियाओं की सेवा को यज्ञ के समान मानते है। वर्तमान में अंधाधुंध शहरीकरण के कारण छोटी चिड़ियाओं की संख्या तेजी से कम होती जा रही है जो चिंता का विषय है। इस कारण पर्यावरणविद इन चिड़ियाओं को संरक्षित करने पर जोर दे रहे है। इनको गौरेया भी कहा जाता है।


पंडित रतन शास्त्री ने मझेला रोड स्थित पंडित फतेहलाल नगर में चिड़ियाओं के लिए भी छोटे-छोटे घर बना रखे है। इससे नहीं चिड़ियाओं को न केवल आश्रय मिलता है बल्कि दाना-पानी भी मिल जाता है। इस कारण पहां अन्य पक्षी भी आते हैं। प्लाईवुड से बनाए इन 30 बॉक्स पर सनमाइका लगाई हुई जिममें लगभग 60 चिड़ियाएं रहती हैं। प. शास्त्री ने बताया कि वह लगभग 15 वर्ष से चिड़ियाओं तहित पक्षियों को दाना-पानी की व्यवस्था अपने घर पर करते रहे हैं। वह इसे पुण्य का कार्य मानते है और उनका कहना है कि यह भी धर्म कर्म का ही हिस्सा है।


करीब 10 साल पहले मकान का कार्य पूरा होने पर होने वाली पूजा पाठ से भी पहले इन चिड़ियाओं के लिए यह घर बनवाए गए। घर में सामान के साथ आने वाले गत्ते के बाक्स को साइज में काटकर यहां लगाया गया था। इनको इस हिसाब से बनाया था ताकि चिड़ियाओं के छोटे बच्चे सीधे नहीं गिरे। इसके साथ ही इनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया ताकि बिल्ली या अन्य कोई जानवर इन्हें अपना शिकार नहीं बना रुके। यह बाहर की दीवार में ऊंचाई पर है और छज्जे के नीचे स्थित है। इसलिए धूप और बरसात से भी बचाव होता है।


इनके घर में आंवला, मीठा नीम और हारसिंगार के भी वृक्ष है और गमले में छोटे पौधे भी हैं। इनमे से एक वृक्ष पर चिड़ियाओं ने घोंसले भी बना रखे है।
इस कारण यहां चिड़िया ही नहीं बल्कि अन्य पक्षी भी आते हैं। इससे दिनभर विशेषकर सुबह शाम पक्षियों की चहचहाट गूंजती रहती है। सेवानिवृत संस्कृत शिक्षक प. शास्त्री ने इन चिड़ियाओं के लिए लकड़ी के 30 छोटे घर बनवाएं जिनमें 60 चिड़ियाएं रहती है। यह चिड़ियाएं उनके परिवर के सदस्यों की तरह ही है। इनकी देशभाल में उनके बेटे बालमुकुंद, गौरीशंकर शर्मा, पोते आनंद और सिद्धार्थ, पोतियां प्राची और कुमकुम सहयोग करते हैं।

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