Kochi: Prime Minister Narendra Modi during the commissioning ceremony of the first indigenously designed and built aircraft carrier, INS Vikrant, at Cochin Shipyard Limited in Kochi, Friday, Sept. 2, 2022. (PTI Photo)(PTI09_02_2022_000079B)

महिला नौसैनिक भी तैनात होगी विक्रांत पर

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2023 में आएगा लड़ाकू भूमिका में
अत्याधुनिक है स्वेदशी युद्धपोत विक्रांत
पीएम मोदी ने किया राष्ट्र को समर्पित


जयपुर.
स्वदेश निर्मित युद्धपोत पर महिला नौसैनिक भी तैनात होगी और देश की रक्षा में बड़ी भूमिका निभाएगी। इसी के साथ इस युद्धपोत पर हथियारों की तैनाती होना बाकी है। इस पर मिग 29 के लड़ाकू विमान और लड़ाकू हेलीकॉप्टर भी तैनात किए जाएंगे। इसके बाद यह पूरी तरह से सक्रिय हो जाएगा। इसमे अभी एक वर्ष का समय और लगेगा और 2023 के मध्य तक यह लड़ाकू भूमिका निभाने में सक्षम हो जाएगा।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 सितंबर को पहले स्वदेशी विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत को राष्ट्र की सेवा में समर्पित किया। इस कार्यक्रम के दौरान औपनिवेशिक अतीत से अलग तथा समृद्ध भारतीय सामुद्रिक विरासत के अनुरूप प्रधानमंत्री ने नौसेना के नये ध्वज (निशान) का भी अनावरण किया।
उपस्थितजनों को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यहां केरल के समुद्री तट पर भारत हर भारतवासी एक नये भविष्य के सूर्योदय का साक्षी बन रहा है। आईएनएस विक्रांत पर हो रहा यह आयोजन विश्व क्षितिज पर भारत के बुलंद होते हौसलों की हुंकार है। उन्होंने कहा कि आज हम सब स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को सच होता देख रहे हैं जिसमें उन्होंने सक्षम और शक्तिशाली भारत की परिकल्पना की थी। प्रधानमंत्री ने कहा विक्रांत विशाल, विराट और विहंगम है। विक्रांत विशिष्ट है विक्रांत विशेष भी है। विक्रांत केवल एक युद्धपोत नहीं है। यह 21वीं सदी के भारत के परिश्रम, प्रतिभा, प्रभाव और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यदि लक्ष्य दूरंत हैं, यात्राएं दिगंत हैं, समंदर और चुनौतियां अनन्त हैं. तो भारत का उत्तर है विक्रांत। आजादी के अमृत महोत्सव का अतुलनीय अमृत है विक्रांत। आत्मनिर्भर होते भारत का अद्वितीय प्रतिबिंब है विक्रांत।
राष्ट्र के नये माहौल पर टिप्पणी करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के भारत के लिये कोई भी चुनौती मुश्किल नहीं रही। उन्होंने कहा आज भारत विश्व के उन देशों में शामिल हो गया है जो स्वदेशी तकनीक से इतने विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण करते हैं। आज आईएनएस विक्रांत ने देश को एक नये विश्वास से भर दिया है देश में एक नया भरोसा पैदा कर दिया है। प्रधानमंत्री ने नौसेना, कोचीन शिपयार्ड के इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और खासतौर से उन कामगारों के योगदान की सराहना की जिन्होंने इस परियोजना पर काम किया है। उन्होंने कहा कि ओणम के आनन्ददायी और पवित्र अवसर ने आज के इस अवसर को और अधिक आनन्ददायी बना दिया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आईएनएस विक्रांत के हर भाग की अपनी एक खूबी है एक ताकत है अपनी एक विकासयात्रा भी है। उन्होंने कहा कि यह स्वदेशी सामथ्र्य स्वदेशी संसाधन और स्वदेशी कौशल का प्रतीक है। इसके एयरबेस में जो इस्पात लगा है वह इस्पात भी स्वदेशी है जिसे डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है तथा भारतीय कंपनियों ने निर्मित किया है। विमान वाहक पोत की विशालता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक तैरते हुए शहर की तरह है। यह इतनी बिजली पैदा करता है जो 5000 घरों के लिये पर्याप्त होगी और इसमें जितने तार का इस्तेमाल हुआ है उसे फैलाया जाए तो वह कोच्चि से काशी पहुंच जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आईएनएस विक्रांत पांच प्रणों की भावना का समुच्चय है जिसका उद्घोष उन्होंने लाल किले की प्राचीर से किया था।
प्रधानमंत्री ने भारतीय सामुद्रिक परंपरा और नौसैन्य क्षमताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छत्रपति वीर शिवाजी महाराज ने इस समुद्री सामथ्र्य के दम पर ऐसी नौसेना का निर्माण किया जो दुश्मनों की नींद उड़ाकर रखती थी। जब अंग्रेज भारत आए तो वे भारतीय जहाजों और उनके जरिये होने वाले व्यापार की ताकत से घबराये रहते थे इसलिये उन्होंने भारत के समुद्री सामथ्र्य की कमर तोडऩे का फैसला किया। इतिहास गवाह है कि कैसे उस समय ब्रिटिश संसद में कानून बनाकर भारतीय जहाजों और व्यापारियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिये गये थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज 2 सितंबरए 2022 वह ऐतिहासिक तारीख है जब भारत ने गुलामी के एक निशान गुलामी के एक बोझ को सीने से उतार दिया है। आज से भारतीय नौसेना को एक नया ध्वज मिला है। उन्होंने कहा कि अब तक भारतीय नौसेना के ध्वज पर गुलामी की पहचान बनी हुई थी लेकिन अब आज से छत्रपति शिवाजी से प्रेरित नौसेना का नया ध्वज समंदर और आसमान में लहरायेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विक्रांत जब हमारे समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा के लिये उतरेगा तो उस पर नौसेना की अनेक महिला सैनिक भी तैनात रहेंगी। समंदर की अथाह शक्ति के साथ असीम महिला शक्ति ये नये भारत की बुलंद पहचान बन रही है। अब भारतीय नौसेना ने अपनी सभी शाखाओं को महिलाओं के लिये खोलने का फैसला किया है। जो पाबंदियां थी वे अब हट रही हैं। जैसे समर्थ लहरों के लिये कोई दायरे नहीं होते वैसे ही भारत की बेटियों के लिये भी अब कोई दायरा या बंधन नहीं होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बूंद-बूंद जल से विराट समंदर बन जाता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस बार स्वतंत्रता दिवस पर स्वदेशी तोपों से सलामी दी गई थी। इसी तरह भारत का एक-एक नागरिक वोकल फॉर लोकल के मंत्र को जीना प्रारंभ कर देगा तो देश को आत्मनिर्भर बनने में अधिक समय नहीं लगेगा।
बदलती भू.रणनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले समय भारत प्रशांत क्षेत्र और हिंद महासागर में सुरक्षा चिंताओं को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाता रहाए लेकिन आज ये क्षेत्र हमारे लिये देश की बड़ी रक्षा प्राथमिकता हैं। इसलिये हम नौसेना के लिये बजट बढ़ाने से लेकर उसकी क्षमता बढ़ाने तक हर दिशा में काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि शक्तिशाली भारत शांतिपूर्ण और सुरक्षित विश्व का मार्ग प्रशस्त करेगा।
इस अवसर पर केरल के राज्यपाल आरिफ मुहम्मद खान, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सर्बानन्द सोनोवाल, वी. मुरलीधरन, अजय भट्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, नौसेनाध्यक्ष एडमिरल आर. हरि कुमार तथा अन्य उपस्थित रहे।

भारत में ही डिजाइन और निर्माण

आईएनएस विक्रांत का डिजाइन भारतीय नौसेना की अपनी संस्था वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। इसका निर्माण पत्तन पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की शिपयार्ड कंपनी कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है। विक्रांत का निर्माण अत्याधुनिक स्वचालित विशेषताओं से लैस है और वह भारत के सामुद्रिक इतिहास में अब तक का सबसे विशाल निर्मित पोत है।
स्वदेशी वायुयान वाहक का नाम उसके विख्यात पूर्ववर्ती और भारत के पहले विमान वाहक पोत के नाम पर रखा गया है जिसने 1971 के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह पोत तमाम स्वदेशी उपकरणों और यंत्रों से लैस है जिनके निर्माण में देश के प्रमुख औद्योगिक घराने तथा 100 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संलग्न थे। विक्रांत के लोकार्पण के साथ भारत के पास दो सक्रिय विमान वाहक पोत हो जाएंगे जिनसे देश की समुद्री सुरक्षा को बहुत बल मिलेगा। इस कार्यक्रम के दौरान औपनिवेशिक अतीत से अलग तथा समृद्ध भारतीय सामुद्रिक विरासत के अनुरूप प्रधानमंत्री ने नौसेना के नये ध्वज (निशान) का अनावरण किया।

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