महिलाओं ने किया उत्साह से पौधरोपण

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बालाजी बगीची महिला योग समिति की ओर से अग्रसेन विहार में आयोजन


मदनगंज-किशनगढ़.
बालाजी बगीची महिला योग समिति द्वारा पौधारोपण कार्यक्रम अग्रसेन विहार में किया गया। योग प्रशिक्षिका डिम्पल अग्रवाल ने बताया अग्रसेन विहार में 51 औषधियुक्त पौधे लगाये गए जिसमे नीम, गिलोय, पीपल, जामुन, बेलपत्र, शमी, नीम्बू, पत्थरचटा, तुलसी जी के पौधे लगाये गए। साथ ही 21 तुलसी जी के पौधे गमले सहित वितरित किये। बालाजी बगीची महिला योग समिति सावन भादो के माह में अलग अलग स्थानों पर पौधारोपण का कार्य करती है। आगामी दिनों 3 चिन्हित स्थानों पर और पौधारोपण का कार्य करेगी।
अग्रसेन विहार प्रबंधक समिति द्वारा पौधों की देखभाल करने का जिम्मा लिया गया। बालाजी बगीची महिला योग समिति द्वारा आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम के लिए बहुत बहुत साधुवाद दिया।

पौधारोपण कार्यक्रम में विशना अग्रवाल, आशा अग्रवाल, सन्तोष बजाज, शशिकला अग्रवाल, वीना अग्रवाल, सुनीता खंडेलवाल, सीमा गोयल, मधु जावला, पुष्पा कामदार, ज्योति लालवानी, नितू मनिहार, स्वेता जैन, सुनीता टिंकर आदि मौजूद रही।
अनेक उपयोगी कार्य के साथ नियमित निशुल्क ऑफलाइन-ऑनलाइन क्लास भी बालाजी बगीची महिला योग समिति द्वारा संचालित होती है। डिम्पल अग्रवाल ने पौधारोपण पर आने वाली महिलाओं का आभार व्यक्त किया। अग्रसेन विहार समिति को स्थान पर पौधारोपण के लिए जगह उपलब्ध कराने के लिए बालाजी बगीची योग समिति द्वारा साधुवाद दिया।

कंपनियों के लिए बनाए जाए सख्त सीएसआर नीतियां

सांसद दीयाकुमारी ने नियम 377 के अंतर्गत लोकसभा में उठाया सीएसआर का मामला

राजसमन्द.
संसद के मानसून सत्र के दौरान सांसद दिया कुमारी ने कम्पनियों के सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के क्षेत्र में सुधार का मुद्दा उठाते हुए कंपनियों के लिए सख्त सीएसआर नीतियां बनाने की मांग की। सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि राजसमंद में हिंदुस्तान जिंक और नुवोको सीमेंट जैसे कई उद्योग हैं जो वर्षों से स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं लेकिन क्षेत्र के विकास के लिए उनका योगदान पर्याप्त नहीं दिया है।
नियम 377 के तहत लोकसभा में बोलते हुए सांसद दीया ने कहा कि सीएसआर का मामला पूरी तरह से कंपनियों पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए कि वे अपने सीएसआर खर्च का क्षेत्र तय करें। कंपनियों के लिए ऐसी सख्त सीएसआर नीतियां होनी चाहिए जिससे कि कंपनियों को अपने फंड का एक निश्चित प्रतिशत क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कि स्कूल, सडक़, अस्पताल आदि का निर्माण के लिए खर्च करना पड़े।
वहीं निजी क्षेत्र की कंपनियों को डॉप्ट हेरिटेज योजना के तहत स्मारकों के रखरखाव में शामिल किया जाना चाहिए। 75 प्रतिशत स्थानीय कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश भी होने चाहिए। सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि इस नीति परिवर्तन से देश के विभिन्न क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास को अत्यधिक लाभ होगा।

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