जब हाइवे पर उतरे लड़ाकू विमान

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने किया बाड़मेर में लैंडिंग स्ट्रिप का उद्घाटन
भारतीय वायुसेना को मिलेगा लाभ


जयपुर.
भारतीय वायुसेना के विमान की आपात लैंडिंग के लिए पहली बार राष्ट्रीय राजमार्ग का इस्तेमाल
ईएलएफ सभी प्रकार के भारतीय वायुसेना के विमानों की लैंडिंग की सुविधा प्रदान करेगा
रक्षा मंत्री ने इसे राष्ट्र की एकता व संप्रभुता की रक्षा के लिए सरकार की तत्परता का एक शानदार उदाहरण बताया
कोविड-19 प्रतिबंधों के बावजूद सिर्फ 19 महीनों में निर्माण पूरा करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की प्रशंसा की
भारतीय वायुसेना के लिए 56 सी-295 एमडब्ल्यू परिवहन विमान की खरीद को कैबिनेट की मंजूरी आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संयुक्त रूप से 9 सितंबर 2021 को राजस्थान के बाड़मेर के पास एनएच-925 पर सट्टा-गंाधव खंड पर भारतीय वायुसेना के लिए आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) का उद्घाटन किया। दोनों मंत्रियों ने इस सुविधा का उद्घाटन करने के लिए सी-130 जे विमान से बाड़मेर की यात्रा की। उन्होंने ईएलएफ पर जिसे मैसर्स जीएचवी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा भारतीय वायुसेना और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की देखरेख में केवल 19 महीनों में बनाया गया है विमान का संचालन भी देखा। यह लैंडिंग स्ट्रिप भारतीय वायुसेना के सभी प्रकार के विमानों की लैंडिंग की सुविधा प्रदान करने में सक्षम होगी।
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कोविड-19 प्रतिबंधों के बावजूद 19 महीनों में आपातकालीन लैंडिंग फील्ड के निर्माण को पूरा करने और इसके लिए मिल-जुलकर काम करने के लिए भारतीय वायुसेना राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और निजी क्षेत्र की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कई विभागों और मंत्रालयों सरकारी और निजी क्षेत्र और नागरिक और रक्षा विभागों के बीच समन्वय का एक बेहतरीन उदाहरण है। रक्षा मंत्री ने भारतीय वायुसेना के विमानों की 3 किमी की दूरी पर लैंडिंग को नए भारत की एक ऐतिहासिक नई ताकत के रूप में परिभाषित किया क्योंकि यह लैंडिंग स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष और 1971 के युद्ध में भारत की जीत के 50 वें वर्ष के साथ मेल खाती है।
रक्षा मंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास ईएलएफ को राष्ट्र की एकता और संप्रभुता की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का एक सजीव उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह राजमार्ग और लैंडिंग क्षेत्र पश्चिमी सीमा के साथ बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा। इस तरह के आपातकालीन क्षेत्र हमारे बलों की अभियानगत और नागरिक सहायता को और अधिक प्रोत्साहन प्रदान करेंगे। यह प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
सिंह ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान उसी तरह के साहस, समर्पण और तत्परता का प्रदर्शन करने के लिए सशस्त्र बलों की सराहना की जिस प्रकार वे अपने विरोधियों का सामना करते हैं। उन्होंने कोविड-19 महामारी से उत्पन्न स्थिति से निपटने में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए भारतीय वायु सेना की सराहना की।
रक्षा मंत्री ने रणनीतिक और महत्वपूर्ण स्थानों पर आपातकालीन लैंडिंग फील्ड के निर्माण पर ध्यान देने के साथ देशभर में सडक़ों और राजमार्गों के नेटवर्क को मजबूत करने के सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि देशभर में सडक़ों राजमार्गों और पुलों का निरंतर निर्माण राष्ट्र निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार द्वारा शुरू की जा रही सडक़ों और राजमार्ग परियोजनाओं ने साबित कर दिया है कि रक्षा और विकास दो अलग-अलग संस्थाए नहीं हैं। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।
यह बताते हुए कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है सिंह ने सीमा पर ढांचागत अवसंरचना को मजबूत करने में सीमा सडक़ संगठन द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अटल सुरंग, रोहतांग का उद्घाटन और पूर्वी लद्दाख के उमलिंगला दर्रे में 19300 फीट की ऊंचाई पर दुनिया की सबसे ऊंची वाहन चलाने योग्य सडक़ का निर्माण कुछ ऐसे उदाहरण हैं।
भारतीय वायु सेना के लिए 56 सी.295 एमडब्ल्यू परिवहन विमान की खरीद के लिए कैबिनेट की मंजूरी का उल्लेख करते हुएए रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कल्पना के अनुरूप यह निर्णय आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम है क्योंकि विमान का निर्माण मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत किया जाएगा।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने भारतीय वायु सेना के लिए तीन किलोमीटर के खंड को ईएलएफ के रूप में विकसित किया है। यह भारतमाला परियोजना के तहत गगरिया-बखासर और सट्टा-गांधव खंड के नव विकसित टू.लेन पक्के हिस्से का भाग है जिसकी कुल लंबाई 196.97 किलोमीटर है और इसकी लागत 765.52 करोड़ रुपये है। यह काम जुलाई 2019 में शुरू हुआ और जनवरी 2021 में पूरा हुआ।
यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित बाड़मेर और जालोर जिलों के गांवों के बीच संपर्क में सुधार करेगी। पश्चिमी सीमा क्षेत्र में स्थित सडक़ का खंड भारतीय सेना की सतर्कता सुनिश्चित करेगा और देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा। सामान्य समय के दौरान सडक़ यातायात के सुचारू संचालन के लिए ईएलएफ का उपयोग किया जाएगा।
इस परियोजना के तहत सशस्त्र बलों की आवश्यकता के अनुसार आपातकालीन लैंडिंग पट्टी के अलावा कुंदनपुरा, सिंघानिया और बखासर गांवों में तीन हेलीपैड का निर्माण किया गया है।
जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी और राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी आपात लैंडिंग सुविधा के उद्घाटन के दौरान मौजूद रहे।

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