राजस्थानी को 8वीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए सांसद ने गृह मंत्रालय से मांगी जानकारी

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नई दिल्ली, 15 मार्च। अजमेर सांसद भागीरथ चौधरी ने मंगलवार को लोकसभा में अतारांकित प्रश्न संख्या 2233 के माध्यम से गृहमंत्रालय से जानकारी मांगी कि भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त भाषाएं कौनसी हंै। आठवीं अनुसूचि में मान्यता प्राप्त भाषाओं को शामिल करना क्या देश में क्षेत्रीय पहचान और भाषाओं के लिए आग्रहपूर्वक मांग के आधार पर किए गए लम्बे आन्दोलन का परिणाम है। किन किन भाषाओं को आठवीं अनुसूचि मेें कब कब सम्मिलित किया गया। आठवीं अनुसूचि में राजस्थानी, भोजपुरी और भोटी भाषाओं को अभी तक सम्मिलित क्यों नही किया गया। इन भाषाओं को कब तक शामिल किए जाने की संभावना है।

वर्ष 1950 में शामिल हुई 14 भाषाएं

सासंद चौधरी के प्रश्नों के प्रत्युत्तर में केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानन्द राय ने बताया कि भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं मे से 26 जनवरी 1950 को 14 भाषाओं असमियां, बंगाली, गुजराती, हिन्दी, कन्नड़, कश्मीरी, मलयालम, मराठी, उडीया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलगू और उर्दू को संविधान में शुरूआत में शामिल किया गया था। सिंधी भाषा को 1967 में, कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली भाषा को 1992 में, बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को 7 जनवरी 2004 को शामिल किया गया था।

मान्यता के अभी कोई मानदंड नहीं – गृह राज्यमंत्री

केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि राजस्थानी, भोजपुरी, भोटी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल करने की मांग समय समय पर उठती रही है। भारत सरकार अन्य भाषाओं को आठवीं अनुसूचि में सम्मिलित करने से संबन्धित भावनाओं और अपेक्षाओं को लेकर सचेत है। चूंकि किसी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल करने पर विचार किए जाने हेतु कोई मानदण्ड वर्तमान में निर्धारित नही है। इसलिए संविधान की आठवीं अनुसूचि में और भाषाओं को शामिल किए जाने की मांगों पर विचार करने के लिए कोई समय -सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती है।

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