इस तरह होता है उपराष्ट्रपति का चुनाव

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छह अगस्त को होगा निर्वाचन
केवल लोकसभा और राज्यसभा सांसद ही कर सकते है मतदान


जयपुर.
भारतीय संविधान के अनुसार राष्ट्रपति के बाद सबसे बड़े संवैधानिक पद उपराष्ट्रपति का होता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से अब तक भारत में 15 उपराष्ट्रपति निर्वाचित हो चुके हैं। 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित एम. वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो रहा है। इसलिए उनके कार्यकाल की समाप्ति के पहले नए उपराष्ट्रपति का चुनाव करना आवश्यक है। इसके लिए भारतीय निर्वाचन आयोग ने तैयारियां शुरू कर उपराष्ट्रपति चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए तारीखों की घोषणा कर दी है। तो आइए जानते हैं कब होगा उपराष्ट्रपति का चुनाव और क्या है पूरी प्रक्रिया-
भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा जारी तारीखों के अनुसार 6 अगस्त की शाम तक देश को नए उपराष्ट्रपति मिल जाएंगे। हालांकि चुनाव संबंधित सारी प्रक्रिया पहले से ही शुरू हो जाएंगी जिसमे नामांकन और मतदान से लेकर मतगणना तक शामिल है। घोषित तारीखों में उपराष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने वाले उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 19 जुलाई तक निर्धारित की गई है। इसके बाद चुनाव के लिए मतदान 6 अगस्त शनिवार को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होगा और उसी दिन मतदान के बाद मतगणना की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाएगी। मतगणना के पूरा होने के साथ ही देश को नए उपराष्ट्रपति मिल जाएंगे।
भारत के उपराष्ट्रपति का पद संविधान के अनुच्छेद 63 में वर्णन किया गया है। पद के आधार पर देखें तो उपराष्ट्रपति का पद राष्ट्रपति से नीचे और प्रधानमंत्री से ऊपर होता है। साथ ही उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति भी होता है इसलिए यह चुनाव समय पर कराया जाना और आवश्यक हो जाता है। संविधान में उपराष्ट्रपति को मुख्य जिम्मेदारी दी गई हैए जिनका निर्वहन उपराष्ट्रपति को करना होता है। राष्ट्रपति का पद किसी वजह से खाली हो जाए तो यह जिम्मेदारी उपराष्ट्रपति को ही निभानी पड़ती है क्योंकि राष्ट्रप्रमुख के पद को खाली नहीं रखा जा सकता है। उपराष्ट्रपति अन्य देशों के साथ कूटनीतिक रिश्ते मजबूत बनाए रखने के लिए विदेश दौरों पर भी जाते है। पद और कार्य को समझने के बाद अब निर्वाचन की प्रक्रिया को विस्तार से जानेंगे।
संविधान में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान किया गया है कि उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव गुप्त मतदान के जरिए होगा। यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से किया जाता है। चुनाव में शामिल मतदाता मतदान की गोपनीयता को सुनिश्चित करते हैं। नियमों के अनुसार मतदान कक्ष में वोट पर निशान लगाने के बाद मतदाता को मतपत्र को मोडकऱ मतपेटी में डालना होता है। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए यह भी स्पष्ट किया जाता है कि चुनाव में मतदान के मामले में कोई भी राजनीतिक दल अपने-अपने सांसदों को कोई व्हिप जारी नहीं कर सकते हैं।
उम्मीदवार के नामांकन पत्र में प्रस्तावक के रूप में कम से कम 20 मतदाता और समर्थक के रूप में कम से कम अन्य 20 निर्वाचकों द्वारा हस्ताक्षर किया जाना चाहिए। प्रस्तावक और अनुमोदक राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य ही हो सकते है। एक निर्वाचक या तो प्रस्तावक या समर्थक के रूप में उम्मीदवार के केवल एक नामांकन पत्र पर अपना हस्ताक्षर कर सकता है। निर्वाचन के लिए जमानत राशि 15 हजार रुपये है जिसे नामांकन पत्र के साथ जमा करना आवश्यक है। इन शर्तों को पूरा करने वाले उम्मीदवार निर्वाचन के कार्यक्रम के अनुसार नामांकन पत्र को नई दिल्ली में रिटर्निंग ऑफिसर को सौंपते है।
राष्ट्रपति चुनाव में चुने हुए सांसदों के साथ विधायक भी मतदान करते हैं लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद ही वोट डाल सकते है।
उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल के द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से किया जाता है।
16 वें उपराष्ट्रपति चुनाव 2022 के लिए निर्वाचक मंडल में निम्न शामिल हैं। राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य, राज्यसभा के 12 मनोनीत सदस्य, लोकसभा के 543 निर्वाचित सदस्य।
उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव गुप्त मतदान के जरिए पूरी की जाती है। इस प्रणाली में निर्वाचक को उम्मीदवारों के नामों के सामने वरीयताएं अंकित करनी होती हैं। वरीयता को भारतीय अंकों के अंतर्राष्ट्रीय रूप में रोमन रूप में या किसी भी मान्यता प्राप्त भारतीय भाषाओं के रूप में चिह्नित किया जा सकता है। वरीयता को केवल अंकों द्वारा दर्शाया जाना चाहिए और शब्दों में नहीं दर्शाया जाना चाहिए। मतदाता उम्मीदवारों की संख्या के आधार पर उतनी ही वरीयताओं को चिह्नित कर सकता है। मतपत्र के वैध होने के लिए पहली वरीयता को चुनना अनिवार्य है अन्य वरीयताएं वैकल्पिक हैं।
मतदान के पश्चात मतगणना नई दिल्ली में निर्वाचन अधिकारी की देखरेख में पूरी होती है। निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के कुल 788 सदस्य होते हैं। चूंकि निर्वाचक मंडल के सभी सदस्य संसद के दोनों सदनों के सदस्य हैं। इसलिए प्रत्येक संसद सदस्य के मत का मूल्य समान होगा अर्थात एक निर्धारित होता है। मतगणना के लिए संसद के दोनों सदनों के सदस्यों के वैध मतों में सर्वाधिक मत पाने वाले उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाता है।

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