बताई बरसों से कार्यरत पंप चालकों की समस्याएं

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राजस्थान जलदाय कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महामंत्री ने मुख्य अभियंता प्रशासन को करवाया अवगत


जयपुर.
जनता जल योजनाओं पर कार्यरत पंप चालकों की समस्याओं को लेकर राजस्थान जलदाय कर्मचारी महासंघ (बीएमएस) के पदाधिकारियों ने की पीएचईडी के मुख्य अभियंता (प्रशासन) से मुलाकात की। राजस्थान जलदाय कर्मचारी महासंघ बीएमएस के प्रदेश अध्यक्ष जेठाराम डूडी के निर्देशानुसार प्रदेश महामंत्री किशोर नाथ सिसोदिया ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के मुख्य अभियंता प्रशासन राकेश लोहारिया से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें यह अवगत कराया कि जनता जल योजनाओं पर कार्यरत पंप चालक कर्मचारियों को 4 माह से वेतन नहीं मिल रहा है। तब मुख्य अभियंता ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं होने की वजह से इनका बकाया वेतन का मामला अटका हुआ है। प्रदेश महामंत्री ने बताया कि जब योजनाएं ही आपके अधीन हो गई है तो फिर योजनाओं पर कार्यरत कर्मचारियों को मजदूरी का भुगतान करने का दायित्व आपका ही बनता है। अत: योजनाओं की सुपुर्दगी तिथि से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ही उनकी बकाया मजदूरी का भुगतान करें। तत्पश्चात राजस्थान जलदाय कर्मचारी महासंघ बीएमएस द्वारा दिए गए पत्र के आधार पर शीघ्र सरकार से स्पष्ट दिशानिर्देश मांग कर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन मुख्य अभियंता ने दिया है।

दशकों से उपेक्षित है पंप चालक

प्रदेश अध्यक्ष जेठाराम डूडी और प्रदेश महामंत्री किशोर नाथ सिसोदिया ने कहा कि जनता जल योजना पर कार्यरत पंप चालकों की सेवा शर्तो के मामले को अधिकारियों द्वारा गंभीरता से नहीं लिया जाना बेहद चिंता जनक है। जनता जल योजनाओं पर कार्यरत कर्मचारियों को 25 से 28 वर्ष की निरंतर सेवा के बाद भी राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा अंशकालीन श्रमिक ही माना गया है जोकि आश्चर्यजनक है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष जेठाराम डूडी एवं प्रदेश महामंत्री किशोर नाथ सिसोदिया के द्वारा संयुक्त बयान जारी कर यह अफसोस जाहिर किया है कि जनता जल योजनाओं का संचालक करने वाले कर्मचारियों को 28 वर्ष की निरंतर सेवा के उपरांत राज्य सरकार से जुड़े अधिकारियों के द्वारा अभी भी अंशकालीन श्रमिक ही माना गया है। 22 जुलाई 2022 को जन स्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग मुख्यालय जयपुर के कार्यालय में जल जीवन मिशन एवं जनता जल योजनाओं के बारे में संबंधित अधिकारियों की हुई संयुक्त बैठक में ऐसे कार्मिकों को अंशकालीन श्रमिक बताकर उनकी सेवा शर्तों को नजरअंदाज कर दिया गया है। इस निर्णय की राजस्थान जलदाय कर्मचारी महासंघ ने कड़ी आलोचना की है। बताया गया है कि 22 जुलाई 2022 को मुख्य सचिव राजस्थान सरकार की अध्यक्षता में जल जीवन मिशन एवं जनता जल योजनाओं के संबंध मे हुई बैठक में जन स्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एग्रामीण विकास विभाग के सचिव पंचायत राज विभाग के सचिव एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के मुख्य अभियंता ग्रामीण तथा जन स्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता ग्रामीण उपस्थित रहे। संबंधित अधिकारियों द्वारा दिए गए सुझावों के बाद मुख्य सचिव राजस्थान सरकार ने यह निर्देश दिया है कि जनता जल योजनाओं पर कार्यरत पंप चालक, अंशकालीन श्रमिकों को अन्य ट्रेडर्स जैसे प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, फिटर इत्यादि में कौशल विकास केंद्रों द्वारा प्रशिक्षण दिया जावे तथा जल जीवन मिशन तथा ग्रामीण जल स्वच्छता समिति द्वारा ऐसे अंशकालीन श्रमिकों को उनके श्रम कौशल के अनुसार उपयोग में लिया जाए।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष डूडी व प्रदेश महामंत्री सिसोदिया ने उक्त निर्णय का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने बताया कि इस बैठक में निरंतर सेवा को देखते हुए ऐसे कार्मिकों को नियमित वेतनमान देने एवं पीएचईडी का कर्मचारी मानने का निर्णय लिया जाना चाहिए था किंतु ऐसा नहीं करके उनके वजूद को ही समाप्त कर दिया गया जो कि बेहद चिंताजनक है। इस निर्णय को देखते हुए तो अब तक दी जा रही न्यूनतम मजदूरी भी आगे के लिए खटाई में पड़ गई है साथ ही नौकरी के भी लाले पडऩे की संभावना प्रबल हो गई है।
उल्लेखनीय है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए राज्य सरकार द्वारा ही वर्ष 1994 में जनता जल योजनाओं का निर्माण किया गया था तथा इन योजनाओं पर वाटर पंप चलाने एवं उसके संपूर्ण संचालन हेतु कर्मचारी भी नियुक्त किए गए थे जिन्हें सर्वप्रथम ग्राम पंचायत द्वारा भुगतान किया जाता था एवं तत्पश्चात पंचायत राज विभाग द्वारा भुगतान किया जाने लगा है। वर्तमान में ऐसे कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी दी जा रही है तथा यह न्यूनतम मजदूरी भी लगभग 4 माह से बकाया चल रही है। ऐसी स्थिति में बकाया मजदूरी का भुगतान होने की आस लगाए बैठे ऐसे कार्मिकों का अब भविष्य भी खतरे में पड़ गया है। जबकि मुख्यमंत्री द्वारा गत दिनों की गई घोषणा के अनुसार जनता जल योजनाओं को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में हस्तांतरित किया जा चुका है। लाजमी है कि जब उक्त योजना पंचायत राज विभाग से हटकर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में हस्तांतरित हो चुकी है तो उक्त योजना पर कार्यरत पंप चालक कर्मचारियों को भी जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में हस्तांतरित होना माना जाना चाहिए। मगर ऐसा नहीं मान कर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों द्वारा इन्हें निर्धारित देय मजदूरी का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है जो कि गलत है। स्वाभाविक है कि योजनाओं के साथ कर्मचारी भी हस्तांतरित हुए है। अब राज्य में लगभग 6000 से अधिक जनता जल योजनाओं पर कार्यत ऐसे कार्मिकों को बेवजह न्याय प्राप्त करने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ेगा जो कि दुखद घटना है। बीएमएस से संबंधित इस जलदाय कर्मचारी महासंघ ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से यह अनुरोध किया है कि आप द्वारा की गई घोषणा के अनुसार जनता जल योजनाओं पर कार्यरत कर्मचारियों की वेदना को सुनकर उन की समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए ताकि इन कार्मिकों को आंदोलन जैसा कोई कदम ना उठाना पड़े। महासंघ ने यह अनुरोध मुख्यमंत्री को जरिए पत्र प्रेषित कर किया है। इसके अलावा महासंघ ने जनता जल योजनाओं के सभी कर्मचारी साथियों को भी यह आश्वस्त किया है कि यह महासंघ उनकी इस समस्या के साथ हर तरह से खड़ा रहेगा।

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