बजट 2022 : विकास की आस में आमजन

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जयपुर। केंद्रीय वित्त मंत्री एन सीतारमण की ओर से पेश किए गए केन्द्रीय बजट 2022 पर लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रया दी है। लोगों ने डिजिटल करेंसी लाने को अच्छा कदम बताया है तो आयकर की सीमा में बढ़ोतरी नहीं करने को निराशाजनक बताया है।

विकास के नए आयाम स्थापित करेगा बजट- सांसद दीया

राजसमन्द। केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि सडक़ व रेल सुविधा के साथ बजट में बुनियादी सुविधाओं को सहज रूप से उपलब्ध करवाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। बजट में किसान, महिला, युवा, व्यापारी, आवास, आंगनवाड़ी, पीने के पानी, खेती, स्वास्थ, शिक्षा, गांव, गरीब और शहरी विकास के साथ ही सभी वर्ग और प्रत्येक क्षेत्र का ध्यान रखा गया है। बजट 2022 विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और मोदी सरकार का आभार।

आमजन हुआ है निराश- सीए सुभाष अग्रवाल

किशनगढ़। सीए सुभाष अग्रवाल का कहना है कि केन्द्रीय बजट 2022 से आमजन को निराशा हाथ लगी है। काफी दिनों से यह चर्चा थी कि आयकर दर, धारा 80सी, राष्ट्री पेंशन प्रणाली से छूट, सरचार्ज आदि में आमजन को काफी रियायतें मिलेंगी। जनता की सब उम्मीदों पर पानी फेरते हुए बजट आमजन के लिए एक झुनझुना ही साबित हुआ है। अग्रवाल ने कहा कि सरकार इस महंगाई के जमाने में दस लाख तक की आय को करमुक्त कर देना चाहिए। डिजिटल करेंसी की घोषणा, वर्चुअल सम्पत्ति पर आयकर, अपडेटेड टैक्स रिटर्न, लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन पर सरचार्ज मेें कमी आदि नई घोषणाएं अच्छी हैं। पांच नदियों का जोडऩा, 25 हजार सडक़ों का निर्माण, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना देश में आधारभूत ढांचा एवं औद्योगिक विकास में नई रफ्तार लाएगी।

कर चोरी रोकने का प्रयास-सीए मोहित जैन

किशनगढ़। सीए मोहित जैन ने बताया कि इस वर्ष कर प्रावधानों की टैक्स स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। साथ ही यह प्रावधान काफ़ी हद तक कठिन व कर चोरी रोकने के लिए मज़बूत किए गए हैं। जैसे कि अब ब्याज को लोन में परिवर्तित करने पर उसे वास्तविक भुगतान ना मानने की दशा में माननीय खर्चों में शामिल नहीं किया जा सकेगा।
इसके अलावा रिटर्न अप्डेट करने की सहूलियत तो दी गई परंतु इसके ऊपर टैक्स का 25-50 प्रतिशत का अतिरिक्त भार पड़ सकता है। साथ ही ऐसे ख़र्चे जिन्हें किसी और क़ानून के अंतर्गत माननीय नहीं माना गया हैं उन्हें इंकम टैक्स में भी कटौती योग्य नहीं माना जाएगा।
विकलांग व्यक्तियों के लिए कर में राहत दी गई है व सहकारी समितियों के लिए वैकल्पिक न्यूनतम कर दर और अधिभार में भी कमी की गई है।
आय व लाभ पर लगने वाले किसी भी सरचार्ज या उपकर को अब से व्यापारिक वह नहीं माना जाएगा जिसका खामियाजा करदाताओं को भुगतना पड़ सकता है।

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