फसल खरीद होने पर मिलेगा एमएसपी का लाभ

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जयपुर. केंद्र सरकार की ओर से रबी की कुछ फसलों पर एमएसपी बढ़ाए जाने पर किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि जब तक केंद्र सरकार किसानों से फसल खरीद सुनिश्चित नहीं करेगी तब तक एमएसपी का लाभ नहीं मिल पाएगा। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा है कि उत्पाद की पर्याप्त खरीद के बिना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कोई सार्थकता नहीं हैं।
जाट ने केन्द्र सरकार द्बारा रवि की उपजो के लिए की गई एमएसपी की घोषणा पर अपनी प्रतिक्रिया में यह बात कही। उन्होंने केन्द्र सरकार की आयात-निर्यात नीति किसानों को एमएसपी से वंचित करने के लिए उत्तरदायी बताते हुए कहा कि दाने दाने की खरीद के बिना न्यूनतम समर्थन मूल्य की सार्थकता नहीं है। गत वर्ष गेंहू के निर्यात नौ गुणा तक बढ़ने से मूल्यों में बढ़ोतरी हुई और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त हुआ लेकिन उस निर्यात नीति में परिवर्तन के कारण गेंहू के भाव नीचे आए और खरीद हुई नहीं।

उन्होंने कहा कि खरीद नीति में भेदभाव के कारण भी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से वंचित किया जाता हैं। उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणाओं को पूर्ण करने के लिए सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए और इसके लिए एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून सर्वोतम मार्ग है। जब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गठित समिति की रिपोर्ट नहीं आये एवं सरकार द्बारा सकारात्मक कार्यवाही नहीं की जाये तब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दामों में क्रय-विक्रय को रोकने के लिए प्रभावी कार्यवाही है। इसके लिए केन्द्र सरकार द्बारा तैयार किए गए कृषि उपज एवं पशुपालन अधिनियम 2०17 के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य से ही खरीद आरंभ करने के संबंध में तत्काल अध्यादेश लाना चाहिए, जिससे किसानों को एमएसपी से कम दामो में अपनी उपजो को बेचने पर विवश नहीं होना पड़े।

जाट ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण के लिये अंतराष्ट्रीय एवं घरेलु मूल्यों के अनुसार सरसों के दामो में 4०० रुपये प्रति क्विटल की बढोतरी कम है। इसी प्रकार मसूर, गेहू, चना के लिए भी की गई बढ़ोतरी न्यायोचित नही है। उन्होंने कहा कि 48 प्रतिशत तेल अंश के आधार पर भी सरसों के दाम 6118 रुपये प्रति क्विटल होने चाहिए।

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