पहली बार एल्युमिनियम से बनी महाराणा प्रताप की प्रतिमा

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-भारती शिल्पकला स्टूडियो में तैयार हुई कलाकृति

जयपुर, 23 जनवरी। पत्थर और कीमती धातु के बाद एल्युमिनियम से प्रतिमाएं बनाने का चलन बढ़ा है। एक खास तकनीक से राजधानी में ऐसी प्रतिमाएं तैयार भी होने लगी है। इन प्रतिमाओं की विशेषता यह है कि यह वजन और जेब के लिहाज से सस्ती पड़ती है। मानसरोवर के भारती शिल्पकला स्टूडियो में पहली बार एल्युमिनियम से महाराणा प्रताप की चेतक सवार प्रतिमा बनाई गई है। प्रतिमा 9.6 फीट ऊंची और 500 किलो वजनी है। इसे  पंचधातु और कांस्य प्रतिमाओं से 40 फीसदी कम कीमत पर तैयार किया गया है। प्रतिमा बनवाने के लिए यह काफी सस्ती और सुविधाजनक साबित हो रही है। प्रसिद्ध युवा मूर्तिकार महावीर भारती और निर्मला कुल्हरी ने इसे तैयार किया है। एल्युमिनियम में इस तरह की यह पहली प्रतिमा है। मूर्तिकार महावीर भारती ने बताया कि एल्युमिनियम से मूर्ति बनाना आसान नहीं है, कई चीजों पर विशेष ध्यान देना होता है। 

बीस कारीगरों की टीम ने दिया अंजाम

प्रबंधक उमेश भारती ने बताया कि प्रतिमा बनाने के लिए सिलिकॉन, कॉपर, आयरन और मैग्नीशियम का मिश्रण तैयार किया गया। बीस कारीगरों की टीम के साथ इसको बनाया गया है। अब चेतक सवार महाराणा प्रताप की 12.6 फीट, 7.6 फीट की वीर दुर्गादास राठौड़ की प्रतिमा एल्युमिनियम में तैयार की जाएगी।

कई शहरों में प्रतिष्ठित है मूर्तियां:

उल्लेखनीय है कि मूर्तिकार महावीर भारती और निर्मला कुल्हरी ने महापुरुषों और अवतारों की विशाल प्रतिमाएं बनाकर देश-विदेश में लगवाई है। दुबई, अयोध्या, द्वारिका, रतलाम, झालावाड़, होशियारपुर, करौली, सुमेरपुर, पाली, आंणद आदि प्रमुख स्थानों पर इनके द्वारा बनाई प्रतिमाएं स्थापित की जा चुकी है।

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