Russia Ucraine War यूक्रेन में फंसी बेटी ने फोन पर कहा…डॉक्टर बनकर आउंगी या कफन में लिपटकर

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नई दिल्ली, 25 फरवरी। यूके्रन और रूस के बीच चल रहे युद्ध से भारत में भी काफी संख्या में लोगों की सांसें अटकी हुई हैं। हमारे देश के कई राज्यों के बच्चे यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में जो बच्चे अभी यूक्रेन में अटके हुए हैं, उनके परिजनों का यहां बुरा हाल है।
ऐसे में ही उत्तर प्रदेश के हरदोई की दो बालिकाएं भी यूक्रेन में मेडिकल की पढा़ई कर रही हैं। उनकी पढ़ाई पूरी होने में केवल पांच माह की ही समय बचा है। अब वो बालिकाएं तो पसोपेश में हैं ही। साथ ही यहां परिजन परेशान हैं। जैसे ही कोई परिचित बालिकाओं की चर्चा शुरू करता है परिजनों की आंखों से आंसू बहना शुरू हो जाते हैं। युद्ध से उनके परिजनों में दहशत है।
हरदोई शहर के रेलवे गंज के रहने वाले डॉ. डीपी सिंह की बेटी अपेक्षा सिंह यूक्रेन के खरकी शहर में स्थित नेशनल खरकी यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की छात्रा है। डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि अगस्त 2016 में बेटी का एडमिशन खरकी यूनिवर्सिटी में कराया था। उन्होंने बताया कि हाल ही उनकी बेटी से बात हुई तब वो बाजार में थी। उसने बताया कि यूक्रेन में इमरजेंसी लगी है। यूनिवर्सिटी में ऑनलाइन क्लासेज चल रही हैं। बेटी एकदम ठीक है, अब उसकी 5 महीने की पढ़ाई बाकी रही है। इसके बाद उसे डिग्री मिल जाएगी।
डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि उनकी बेटी ने फोन पर कहा कि या तो वह अब डिग्री लेकर आएगी या कफन में लिपटकर। उसने कहा कि अब वापस आने का मतलब है कि डिग्री छोड़ देना।

अपेक्षा के अलावा हरदोई के सांडी ब्लॉक के रहने वाले महेंद्र यादव की बेटी वैशाली भी वहां फंसी हुई है। वैशाली तेरा पुरसौली की वर्तमान में प्रधान भी है। वैशाली भी यूक्रेन से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। वह भी सकुशल है।

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