राजस्थान अपने सेवा पोर्टलों के लिए अग्रणी राज्यों में शामिल

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समूह बी राज्यों समाज कल्याण के क्षेत्र में अव्वल


जयपुर.
राष्ट्रीय ई गवर्नेंस सर्विस डिलीवरी असेसमेंट-2021 रिपोर्ट के तहत राज्य सेवा पोर्टलों के मूल्यांकन में राजस्थान अपने सेवा पोर्टलों के लिए सभी मानकों में 75 प्रतिशत से अधिक के अनुपालन के साथ अग्रणी राज्य है। रिपोर्ट के अनुसार समूह बी राज्यों में राजस्थान ने समाज कल्याण के क्षेत्र में रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया है।
शासन सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता डॉ. समित शर्मा ने बताया कि भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय ई.गवर्नेंस सर्विस डिलीवरी असेसमेंट रिपोर्ट-2021 जारी की गई है। यह रिपोर्ट राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों के मूल्यांकन को कवर करते हुए सरकारों को अपनी ई.गवर्नेंस सेवा वितरण प्रणाली को बढ़ावा देने एवं और बेहतर बनाने के उद्देश्य से जारी की गई है।
उन्होंने बताया कि इस रिपोर्ट में सात क्षेत्रों यथा वित्त, श्रम और रोजगार, शिक्षा, स्थानीय शासन तथा उपयोगिता सेवाएंए समाज कल्याण, पर्यावरण एवं पर्यटन क्षेत्रों की सेवाएं शामिल है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को समूहों में वर्गीकृत किया है। उत्तर.पूर्व और पहाड़ी राज्य पहला समूह बनाते हैं जबकि केंद्रशासित प्रदेश दूसरा समूह बनाते हैं। भारत के अन्य राज्यों को शेष राज्य समूह ए और शेष राज्य समूह बी के रूप में दो राज्यों में वर्गीकृत किया गया है।
डॉ. शर्मा ने विभाग द्वारा किये गये नवाचारों की जानकारी देते हुए बताया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा 11 सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का ऑटो अप्रूवल का पोर्टल तो पूरे भारत में यूनिक है। अभी तक 8.8 लाख लोग इससे लाभान्वित हो चुके हैं। उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति पोर्टल में पिछले वर्ष डिजिलॉकर जन आधार के बेसिस पर जानकारी जुटाना, एपीआई के माध्यम से सीबीएसई व आरबीएसई से मार्कशीट प्राप्त करना जैसे अनेक सुधार किए गए हैं। इस वर्ष तो पोर्टल में अनेक नए प्रावधान जोड़े गए हैं जिससे उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति में डी एल ओ के कार्यभार में काफी कमी आएगी और त्रुटियां होने की संभावना भी नगण्य हो जाएगी। संभवत पहली बार हम समय पर सभी पात्र लाभार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान कर पाएंगे।
शासन सचिव ने कहा कि इसके साथ मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना के पोर्टल को भी ऑनलाइन कर दिया गया है और उसमें अधिकतर दस्तावेजों का स्वत: सत्यापन होगा और मेरिट कैलकुलेट करने में कंप्यूटर का ही प्रमुख रोल होगा। सिलिकोसिस का नवीन पोर्टल बनकर तैयार है और 17 जिलों में लागू कर दिया गया है। शेष सभी जिलों में शीघ्र करने की योजना हैए जिसमें एक्स.रे ऑनलाइन रेडियोलॉजिस्ट को भेजा जाएगा और उसके रिपोर्ट के आधार पर अधिकृत चिकित्सा अधिकारी जो सर्टिफिकेट जारी करेगा। उससे ही डिजिटली ई साइन के माध्यम से स्वत: ही स्वीकृति जारी हो जाएगी और प्रार्थी के खाते में सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से भेजी जा सकेगी।
डॉ शर्मा ने बताया कि छात्रावासों और आवासीय विद्यालय के लिए भी नवीन एच एस एम एस पोर्टल तैयार किया गया है जिससे ना सिर्फ छात्रों का एडमिशन आदि व्यवस्थित रूप से हो सकेगा अपितु इसके साथ साथ अन्य कार्य भी ऑनलाइन संभव हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि उनका सपना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की समस्त योजनाओं को लाभार्थियों की सुविधा के लिए ऑनलाइन करना है। विभाग को आईटी के रंग में रंगना है जिससे लाभार्थी सरलता से सुगमता से बिना किसी कठिनाई अथवा विलंब के या भ्रष्टाचार के योजना का लाभ प्राप्त कर सके और विभागीय अधिकारियों और कार्मिकों के कार्यभार में भी कमी आए।
शासन सचिव ने बताया कि विभाग के लगभग 20 और प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का उपयोग भी किया जाएगा और ऐसा करने वाला हमारा विभाग राजस्थान राज्य में सबसे पहला विभाग होगा। उन्होंने आशा जताई कि एक मजबूत टीम के रूप में विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सहयोग से विभाग नित नई ऊंचाइयों को छू सकेगा।

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