पर्यावरण बचाने के लिए कई उपाय कर रही है रेलवे

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ग्रीन एनर्जी सहित प्लास्टिक का कचरा रोकने के उठाए कदम
संदर्भ : 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस


जयपुर.
बिजली की बचत और पर्यावरण संरक्षण का उत्तरदायित्व आज व्यक्ति विशेष का न होकर सभी का हो गया है ताकि आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ जीवन प्रदान किया जा सके। ऊर्जा संरक्षण के साथ पर्यावरण को सुदृढ़ बनाने के लिये रेलवे भी लगातार सकारात्मक कदम उठा रहा है, जिसमें परम्परागत संसाधनों के स्थान पर पर्यावरण अनूकुल स्त्रोतों का अधिकाधिक उपयोग किया जा रहा हैं।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी कैप्टन शशिकिरण के अनुसार विजय शर्मा, महाप्रबंधक के नेतृत्व में उत्तर पश्चिम रेलवे अपने प्रयासों को गति प्रदान कर प्रदूषण रहित पर्यावरण की मुहिम को बढ़ाने के साथ-साथ राजस्व की भी बचत कर रहा है। इस रेलवे पर विगत समय में सौर ऊर्जा पर काफी कार्य किये गये है। इस रेलवे पर कुल 7126 किलोवॉट क्षमता के सोलर पैनल स्थापित किये गये है। इनसे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लगभग 5 करोड़ के राजस्व की बचत भी प्रतिवर्ष हो रही है। हरित ऊर्जा की पहल के अन्तर्गत जयपुर, अजमेर तथा जोधपुर स्टेशनों पर उच्च क्षमता के सोलर पैनल स्थापित कर ऊर्जा प्राप्त की जा रही है। इसके साथ ही जैसलमेर में 26 मेगावाट का विण्ड-मिल भी कार्य कर रहा हैं, इस ऊर्जा संयंत्र से प्रतिवर्ष लगभग 73 एमयू ऊर्जा उत्पादित हो रही है।
बिजली की बचत के लिये इस रेलवे पर ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग किया जा रहा हैं। ऊर्जा दक्ष उपकरणों में रेलवे द्वारा एलईडी आधारित उपकरणों का अधिकाधिक प्रयोग किया जा रहा है। स्टेशनों पर एलईडी लाइट, बोर्ड, हाई मास्ट टावर इत्यादि लगाये गये है। एलईडी आधारित उपकरणों से प्रकाश की क्वालिटी बेहतर प्राप्त होती है साथ ही इनसे बिजली की भी बचत होती है। शत प्रतिशत एलईडी लाइटों का उपयोग किया जा रहा है और 2,36,000 एलईडी फीटिंग्स को रेलवे कार्यालयों, स्टेशनों, भवनों, रेलवे क्वार्टरों इत्यादि में लगाया गया। इससे प्रतिवर्ष 103 लाख यूनिट बचत की जा रही है।
स्टेशनों पर प्लास्टिक बोतल का कचरा अधिक होता है और इसे इधर-उधर फेंक देने से गंदगी फैलती है और यह पर्यावरण को दूषित भी करता है, इसके निराकरण के लिये जयपुर, जोधपुर आबूरोड, बीकानेर, हिसार, लालगढ, गंाधीनगर जयपुर, अलवर तथा जैसलमेर और अजमेर स्टेशनों पर बोतल क्रशर प्लांट स्थापित किये गये है, जिससे प्लास्टिक बोतलों का उचित निस्तारण होता है। इनके अतिरिक्त अन्य स्टेशनों पर भी बोतल क्रशर प्लांट लगाये जाने का कार्य विचाराधीन है।
गाडिय़ों की धुलाई में उपयोग किये गये पानी के पुन: उपयोग हेतु जयपुर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, हिसार, अजमेर तथा बाडमेर स्टेषनों पर स्थापित वाटर रि-साइकिल प्लांट द्वारा पानी की बचत की जा रही है। इसी प्रकार जोधपुर, मेडता रोड, मदार, बीकानेर, हिसार, बाडमेर, लालगढ, उदयपुर व श्रीगंगानगर में ऑटोमैटिक कोच वाशिंग संयंत्र द्वारा पानी की बचत की जा रही है। इसके अतिरिक्त बारिश के पानी को सहेज कर पुन: उपयोग के लिये 100 से अधिक स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट उपलब्ध है तथा आगामी समय में अन्य स्थानों पर भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
उत्तर पश्चिम रेलवे पर पर्यावरण संरक्षण तथा प्रदूषण को नियंत्रित करने के किये गये कार्यों को मद्देनजर रखते हुये स्टेट पॉल्यूशन कन्ट्रोल बोर्ड द्वारा 33 स्टेशनों को सर्टिफिकेट जारी किये गये है। उत्तर पश्चिम रेलवे के 10 संस्थानों/बिल्डिंग्स को आईजीबीसी द्वारा ग्रीन रेटिंग प्रदान की गई है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के प्रधान कार्यालय में गत 3 जून को पर्यावरण दिवस की थीम पर सेमीनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में मुख्य वक्ता अरिजीत बनर्जी, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन्य संरक्षक (आई.टी), राजस्थान सरकार द्वारा पर्यावरणके क्षेत्र में रेलवे द्वारा किये गये प्रयासों जैसे उत्सर्जन में कमी और विद्युतीकरण, जल प्रबंधन, अक्षय ऊर्जा का उपयोग, कचरा प्रबन्धन, वनीकरण एवं ऊर्जा प्रबन्धन की सराहना की। इसके अतिरिक्त प्राकृतिक संसाधनों, वानिकी के उपयोग तथा स्टेशनों पर बायो-टायलेट तथा अक्षय ऊर्जा के अधिक उपयोग पर विस्तृत चर्चा की गई।
रेलवे द्वारा अपने हरित पर्यावरण के दायित्व की अनुपालना के लिये समय-समय पर वृक्षारोपण किया जाता है, उत्तर पश्चिम रेलवे पर विगत वर्षों में लगभग 5 लाख से अधिक वृक्षों का वृक्षारोपण किया गया।

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