नौकरी की उम्मीद में बूढ़े हो रहे कला के कद्रदान

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वर्ष 1992 के बाद नहीं हुई कला शिक्षकों की भर्ती

अजमेर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में करीब 30 साल से कला शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई। ऐसे में कला शिक्षा में नौकरी की उम्मीद पाले काफी युवा तो बुढ़ापे की दहलीज तक पहुंच चुके हैं। कला के कद्रदानों की ऐसी अनदेखी का शायद पहला ही उदाहरण होगा ऐसा, जहां नौकरी की उम्मीद में कला के कद्रदान युवा ओवरएज हो रहे हैं, लेकिन भर्ती निकलने का इंतजार खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। राजस्थान मेें कला शिक्षकों की भर्ती वर्ष 1992 बंद है।
वहीं प्रदेश के सभी स्कूलों में कला शिक्षा को अनिवार्य विषय के रूप में भी शामिल किया हुआ, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार कला शिक्षकों की भर्ती नहीं कर रही है। इससे स्कूलों में कला शिक्षा को अन्य विषयों के शिक्षकों के भरोसे छोड़ा हुआ है। ऐसे में विद्यार्थियों को तो परेशानी हो ही रही है। साथ ही कला शिक्षा में डिग्री ले चुके प्रदेश के युवा बेरोजगार घूम रहे हैं।

सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी

काफी समय से नौकरी की उम्मीद लिए बेराजगार कला शिक्षकों का धैर्य अब जवाब देने लगा है और उन्होंने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में कला शिक्षक अब आंदोलन की तैयारी में जुटे हैं। इसके लिए कला में डिग्री ले चुके युवाओं ने कला शिक्षकों की भर्ती निकालने की मांग को लेकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में मुख्यमंत्री व शिक्षा के नाम ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपे हैं।

यह है नियम

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों में कला शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा और कार्य शिक्षा विषयों के शिक्षण के लिए शिक्षकों की नियुक्ति किया जाना अनिवार्य किया गया है। वहीं इस मामले में राज्यपाल के पत्र पर उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न विश्वविद्यालयों के कला विशेषज्ञों की कमेटी भी गठित की गई थी। कमेटी ने अपनी अनुशंसाओं के साथ सरकार को रिपोर्ट भी सौंप दी, लेकिन सरकार अब रिपोर्ट पर कोई एक्शन नहीं ले रही है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कला शिक्षक नहीं होने के बावजूद इन विषयों की पढ़ाई के साथ परीक्षा भी ली जा रही है। ऐसे में सरकारी अनदेखी से बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है।

काफी समय से नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं ने अब राज्यपाल के पत्र पर उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित विश्वद्यालयों के कला विशेषज्ञों की कमेटी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट की अनुशंसाओं को तुरंत लागू करने की मांग की है, जिससे उन्हेें नौकरी मिल सके।

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