खेल में महत्वपूर्ण है जुनून और टीम भावना

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राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय ने किया खेल हस्तियों के साथ संवाद


जयपुर.
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय ने हाल ही में प्रख्यात खेल हस्तियों के साथ एक ऑनलाइन संवादात्मक सत्र का आयोजन किया। कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय की खेल समिति द्वारा एक खिलाड़ी की यात्रा संघर्ष एवं सफलता विषय पर किया गया।
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नीरज गुप्ता ने प्रतिष्ठित खेल हस्तियों का स्वागत किया जिनमें द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता बॉक्सिंग प्रशिक्षक जीएस संधू, पीयूष दुबे भारतीय पुरुष हॉकी टीम टोक्यो ओलंपिक 2020 के हॉकी प्रशिक्षक और मनोज कुमार ओलंपियन अर्जुन पुरस्कार विजेता शामिल रहे। जी एस संधू ने विश्वविद्यालय में खेल विज्ञान के लिए एक समर्पित स्कूल होने और एक खिलाड़ी की यात्रा संघर्ष एवं सफलता जैसे रोचक विषय पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए विश्वविद्यालय की सराहना की। उन्होंने इस तथ्य पर प्रकाश डाला कि खेल में जुनून और टीम भावना महत्वपूर्ण कारक हैं और विश्वविद्यालय राष्ट्र में खेलों के विकास के लिए बुनियादी आधार हैं ।
पीयूष दुबे ने खिलाडिय़ों द्वारा महामारी के दौरान महसूस किए गए मनोवैज्ञानिक दबाव के प्रभाव को समझने पर जोर दिया। मनोज कुमार ने कहा कि दृढ़ता, लचीलापन और कड़ी मेहनत सफलता की कुंजी है।
इस आयोजन की काफी सराहना हुई क्योंकि विश्व महिला युवा मुक्केबाजी चैम्पियनशिप 2021 की चैंपियन अल्फिया पठान सहित पूरे देश के लगभग 100 से अधिक प्रतिभागी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
स कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों द्वारा प्रश्न भी पूछे गये जिनका उत्तर विशेषज्ञों द्वारा दिया गया। इसका संचालन डॉ. गुनीत इंदर जीत कौर ने किया ।

समावेशी हो शासन प्रणाली

शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसीद्ध ने सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के दृष्टिकोण के अंतर्गत समावेशी शासन प्रणाली सुनिश्चित करना प्रत्येक व्यक्ति को महत्वपूर्ण बनाना विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने वेबिनार को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष डीपी सिंह संयुक्त सचिव उच्च शिक्षा नीता प्रसाद और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
इस अवसर पर अपने सम्बोधन में अर्जुन मुंडा ने कहा कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय योजना समावेशी शिक्षा के प्रति प्रधानमंत्री के दूरदर्शी दृष्टिकोण को प्रदर्शित करती है। ईएमआरएस आदिवासी क्षेत्रों में हाशिए की आबादी के लिए शिक्षा की पहुंच प्रदान करता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य समानता और समावेश सुनिश्चित करना है। इस नीति 2020 ने आदिवासी समाज की शिक्षा को एक राष्ट्रीय स्वरूप दिया है और यह सुशासन का एक सच्चा घोषणा पत्र है। डिजिटल इंडिया, समग्र शिक्षा आदि जैसे कार्यक्रम आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद कर रहे हैं।
अमित खरे ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों सहित समाज के वंचित वर्ग के विद्यार्थियों की समस्याओं पर प्रकाश डाला। साथ ही हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि कोई भी विद्यार्थी पीछे न रहे।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी के अध्यक्ष डीपी सिंह ने अपने उद्घाटन भाषण में उच्च शिक्षण संस्थानों के नेतृत्व से समावेश पर विशेष ध्यान देने के साथ सुशासन की दिशा में ठोस प्रयास करने और अपने सभी घटकों को समान रूप से अवसर प्रदान करने का प्रयास करने का आह्वान किया।
इस वेबिनार का आयोजन बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के सहयोग से किया गया था। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो संजय सिंह ने स्वागत भाषण दिया। लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक राय ने विभिन्न पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के लिए मूल्य निर्माण और मूल्यवर्धन पर जोर दिया।
तकनीकी सत्र की अध्यक्षता भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय सोनीपत की पूर्व कुलपति प्रो. सुषमा यादव ने की। इसके अलावा सदस्य यूजीसी प्रो एमएम सालुंखे, भारती विद्यापीठ पुणे के कुलपति, प्रो. एचसीएस राठौर पूर्व कुलपति दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रो. भीमराय मेत्री और निदेशक आईआईएम नागपुर ने तकनीकी सत्र को संबोधित किया।

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