खतरनाक बीमारियां पैदा करता है बाहर का खानपान

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खाने के तेल का होता है कई बार उपयोग
शोधकर्ताओं ने बताया बेहद खतरनाक


जयपुर.
बाहर का खानपान बीमार कर देता है यह बात तो सब जानते है लेकिन खतरनाक बीमारियां पैदा कर देता है यह बहुत कम लोग जानते है। सडक़ों के किनारे कई ढाबों और ठेलों पर व बहुत सी जगहों पर वैज्ञानिकों के अनुसार उपयोग किये गये करीब 60 प्रतिशत खाद्य तेल का भोजन में फिर से उपयोग किया जाता है। उपयोग किया गया या जला हुआ यह खाद्य तेल कैंसर, हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढाता है और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है।
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन ने कोअन एडवाइजरी गु्रप और फिनलैंड की खाद्य तेल कंपनी नेस्टे के सहयोग से एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि उपयोग में लाये जा चुके खाद्य तेल का वाणिज्यिक व्यापार संचालकों द्वारा दुबारा उपयोग बढता जा रहा है। खासतौर पर छोटे रेस्तरां और खोमचे वाले जल कर काले पड़ चुके खाद्य तेल की आखिरी बूंद तक इस्तेमाल करते हैं।
अध्ययन के तहत देश के चार महानगरों कोलकाता, मुंबई, दिल्ली और चेन्नई में खोमचे वाले और छोटे रेस्तरां सहित करीब 101 बड़े आकार के और 406 छोटे आकार का सर्वेक्षण किया गया। सीके बिरला अस्पताल के पेट सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. अमित जावेद के अनुसार पुन: उपयोग में लाये जाने वाले खाद्य तेल में होने वाली रासायनिक प्रक्रिया से उसके अणु कैंसरकारी हो जाते हैं। खाद्य तेल का दुबारा उपयोग किए जाने से पेट के कैंसर और आहार नली के कैंसर के अलावा हृदय संबंधी रोग हो सकता है। खाद्य तेल को एक बार से अधिक उपयोग में नहीं लाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा नियामक एजेंसियों ने खाद्य तेल के उपयुक्त उपयोग पर दिशानिर्देश तैयार किये हैं। जन स्वास्थ्य के हित में इनका अवश्य पालन किया जाना चाहिए। भारत में उपयोग में लाये जा चुके खाद्य तेल के उपभोग पर खाद्य सुरक्षा दिशा निर्देशों के तहत सख्त निषेध है। हेल्थ इनिशिएटिव ओआरएफ के सीनियर फेलो एवं रिपोर्ट के सह लेखक उमेन कुरियन ने कहा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने नियमित रूप से खाद्य व्यापार संचालकों को खाद्य तेल उस वक्त बदल देने की नियमित रूप से सलाह दी है जब टोटल पोलर कम्पाउंड का स्तर 25 प्रतिशत पहुंच जाता है। उन्होंने कहा खाद्य तेल के पुन: उपयोग से ऐथरोस्क्लरोसिस, उच्च रक्तचाप, लीवर संबंधी रोग और अल्जाइमर होने का खतरा बढ जाता है। रिपोर्ट में सरकारी खाद्य सुरक्षा प्राधिकरणों, चिकित्सकों, आहार विशेषज्ञों के नेटवर्क और निजी क्षेत्र के संगठनों के बीच व्यापक सहयोग की जरूरत को रेखांकित किया गया है ताकि साक्ष्य जनित नियामक एवं नीतिगत ढांचा बनाया जा सके। इससे लोगों के व्यवहार में बदलाव लाया जा सकेगा और उपभोक्ता जागरूकता बढा कर उपयोग में लाये जा चुके खाद्य तेल के दुबाराउपयोग को रोका जा सकेगा।

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