सांसद दीया ने प्रश्नकाल में उठाया मनरेगा के संविदा कर्मियों को स्थाई करने का मुद्दा

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संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन

केंद्रीय मंत्री ने कहा- योजना राज्य सरकारों द्वारा कार्यान्वित की जाती है इसलिए यह राज्य की जिम्मेदारी

राजसमन्द। लोकसभा में मानसून सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान राजसमन्द सांसद दीयाकुमारी ने मनरेगा योजना के अंतर्गत संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के सम्बन्ध में प्रश्न करते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह से पूछा कि सरकार की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के संविदात्मक कर्मचारियों द्वारा अपनी नौकरियों को नियमित किए जाने हेतु की जा रही मांगों के सम्बन्ध में क्या कार्यवाही कर रही है।

तारांकित प्रश्न के दौरान सांसद ने पूछा कि क्या सरकार का विचार ऐसे संविदात्मक कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु कोई नई योजना आरंभ करने का है। यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है और यदि नहीं, तो इसके क्या कारण हैं। सरकार को विशेषकर राजस्थान राज्य में मनरेगा कर्मचारियों तथा राज्य रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत नियुक्त कर्मचारियों के मध्य व्याप्त वेतन संबंधी विषमताओं से संबंधित समस्याओं का समाधान भी करना चाहिए।

प्रश्न के जवाब में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि सरकार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के संविदा कर्मचारियों से उनकी नौकरियों को नियमित करने की मांगों के संबंध में केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली के माध्यम से शिकायतों की जानकारी मिली है। संबंधित राज्य सरकारों से इस मामले को देखने का अनुरोध किया था लेकिन राज्य सरकारों ने सीपीजीआरएएमएस के माध्यम से उत्तर दिया है कि संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के अनुरोध पर विचार नहीं किया जा सकता।

विदित रहे कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना राज्य सरकारों द्वारा कार्यान्वित की जाती है और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की धारा 18 के अनुसार इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यकता होने पर राज्य सरकार जिला कार्यक्रम समन्वयकर्ता और कार्यक्रम अधिकारी को आवश्यक स्टाफ और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगी। उक्त योजना के लिए जनशक्ति की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। विधि अनुसार केंद्र सरकार केवल प्रशासनिक व्यय वहन करने के लिए निधियों के आवंटन के माध्यम से इस संबंध में राज्य सरकार की सहायता करती है। यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

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