Lord Ganesha शादी के लिए इस गणेश मन्दिर में लगती है हर साल कुंवारे युवक-युवतियों की कतार

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जोधपुर। शहर में गणेशजी का एक ऐसा मन्दिर है, जो साल में एक बार खुलता है। इस मन्दिर में भगवान गणेश के दर्शन सिर्फ गणेश चतुर्थी वाले दिन ही होते हैं। मन्दिर का नाम उच्छिष्ट गणपति है और यह देश भर के चुनिंदा मन्दिरों में एक है, जहां कुंवारे युवक-युवतियों की कतार लगती है। मेहरानगढ़ दुर्ग की तलहटी पर सिंगोड़ियों की बारी के पास अमरनाथ एवं नवग्रह मन्दिर के प्रांगण में स्थित उच्छिष्ट गणपति का यह मन्दिर गणेश चतुर्थी के दिन ही खोला जाता है, वह भी केवल 12 घंटे के लिए ही खुलता है।

दस हजार आहुति के बाद खुलते हैं कपाट

मान्यता के अनुसार इस मन्दिर को खोलने का एक विधान है। मन्दिर के कपाट खुलने से पहले दस हजार आहुति यज्ञ में दी जाती हैं। इसके बाद मन्दिर के कपाट खोले जाते हैं। यहां भगवान गणेश के दर्शन शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक किए जा सकते हैं। मान्यता है कि इस मन्दिर में उन लोगों की मुराद पूरी होती है, जिनके विवाह में कोई बाधा आ रही है। यहां गणपति बप्पा को सिंदूर और दूर्वा चढ़ाने से कुंवारे युवक-युवतियों का विवाह जल्दी तय हो जाता है। जिस किसी के वैवाहिक जीवन में समस्याएं आ रही हैं, वह भक्त भी यहां दर्शन के लिए आ सकते हैं।

35 साल पहले बना था मंदिर

मन्दिर के पुजारी कमलेश दवे के अनुसार मन्दिर का निर्माण 35 साल पूर्व उनके पिता ने करवाया था। तब से अब तक यह मन्दिर केवल एक दिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष (चतुर्थी) गणेश चतुर्थी को सूर्यास्त के बाद खोला जाता है और दूसरे दिन सुबह छह बजे पट बंद कर दिए जाते हैं। उन्होनें बताया कि प्रति वर्ष यहां पर गणेश चतुर्थी के दिन भोर होने से पहले ही कुंवारे युवक युवतियों की कतार लगनी शुरू हो जाती है।

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