Liver Disease: हर साल लीवर संबंधी बीमारियों से हो रही हैं 20 लाख से ज्यादा मौतें

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जयपुर। साजन चले ससुराल फिल्म के गाने दिल, जान, जिगर तुझ पे निसार किया है से लेकर सुनिधि चौहान के आेंकारा फिल्म में गाए गाने बीड़ी जलइले जिगर से पिया … तक बॉलीवुड के गीतकारों ने जिस जिगर की बात की है वह मानव शरीर का अिभन्न अंग लिवर ही है, जिसे हिंदी में यकृत कहा जाता है। बॉलीवुड की फिल्मों में प्यार को परवान चढ़ाने वाला यह लिवर इन दिनों जख्मी हो रहा है। आधुनिक जीवन शैली, दूषित खान-पान व प्रदूषण के चलते लिवर रोगों से दुनियाभर में हर साल लगभग 20 लाख मौतें हो रही हैं। लिवर रोग होने के कई कारण होते हैं, जिसमें से शराब का सेवन एक मुख्य कारण है। लिवर रोग होने पर जब लिवर के कार्यों में बाधा आती है तो कुछ लक्षण दिखते हैं। इन्हीं के जरिए लिवर संबंध रोग होने का अनुमान लगाया जा सकता है। लिवर रोग के शुरुआती स्तर पर कुछ घरेलू उपाय और परहेज करने से यह ठीक किया जा सकता है। अगर घरेलू उपायों और नॉन सर्जिकल उपचारों से लिवर रोग ठीक नहीं होता है तो अंत में सर्जरी और लिवर ट्रांसप्लांट का विकल्प बचता है। लिवर हमारे शरीर का अहम हिस्सा है। लिवर में कुछ कारणों जैसे इन्फेक्शन, ऑटो इम्यून डिजीज, बीमारी और गलत जीवनशैली के कारण रोग हो सकता है। लिवर रोग को ठीक करने के लिए जीवन शैली सुधार, घरेलू उपाय और दवाइयों की मदद ली जाती है। अगर क्रॉनिक लिवर रोग गंभीर हो जाता है तो लिवर ट्रांसप्लांट करना पड़ सकता है। लिवर रोग में वसायुक्त भोजन, शराब और अधिक मीठा खाने से परहेज करना चाहिए। हम आपको यहां बता रहे जिगर के बारे में वो सब, जो आपने फिल्मों के जरिए अभी तक नहीं जाना है।

शरीर का दूसरा सबसे बड़ा अंग है जिगर

लिवर यानी जिगर त्वचा के बाद शरीर का दूसरा सबसे बड़ा अंग है, जो फेफड़ों के ठीक नीचे दाहिनी तरफ होता है। इसका मुख्य काम पित्त और एल्बुमिन का निर्माण करना, रक्त साफ करना, अमीनो एसिड और खून के थक्के ( ब्लड क्लॉटिंग ) को रेगुलेट करना, इन्फेक्शन से बचाना, विटामिन और खनिज (मिनरल) को स्टोर करना, ग्लूकोज की प्रक्रिया करना और ऐसे ही कई अन्य कार्य करना होता है। इसलिए लिवर का स्वस्थ होना आवश्यक होता है।

अनदेखी पड़ सकती है भारी

जब लिवर में किसी प्रकार का संक्रमण, अधिक चर्बी का जमाव या शराब के कारण लिवर के ऊतक खराब होने लगते हैं तो यह लिवर रोग को उत्पन्न करते हैं। ऐसे में आपका लिवर अपने कार्यों को उचित तरीके से नहीं कर पाता है। उन कार्यों में कहीं न कहीं व्यवधान होता है। ऐसे में लंबे समय तक इन बीमारियों का उपचार न होने पर लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति देखने को मिलती है। अंततः लिवर रोग के कारण लिवर कैंसर और लिवर फेल भी हो सकता है।

लिवर रोग के लक्षण

लिवर रोग होने पर कुछ लक्षण देखने को मिल सकते हैं। इन लक्षणों के दिखने पर लिवर रोग की आशंका रहती है। अगर किसी व्यक्ति के लीवर रोग है तो उसकी आंखों और त्वचा का रंग पीला हो जाता है। मूत्र का रंग गहरा पीला हो जाता है। मल का रंग हल्का हो जाता है। पेट में सूजन होने लगती है और इसके अलावा पैरों और एड़ियों में भी सूजन की समस्या बनी रहती है। जी मिचलाना, उल्टी होना, पेट में तेज या हल्का दर्द होना, भूख में कमी आना और कुछ भी खाने पीने की इच्छा न होना भी लिवर रोग के लक्षण हैं। हाथों, पैरों, पीठ और पेट की त्वचा में खुजली होना भी लिवर रोग के कारण हो सकते हैं।

लिवर रोग के कारण

लिवर रोग होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं- जैसे लिवर में संक्रमण, कुछ जन्मजात बीमारियां और ऑटो इम्यून विकार होने से भी लिवर रोग होता है। लिवर रोग होने के पीछे खराब जीवनशैली भी एक मुख्य कारण है।

शराब पीना: अल्कोहल का अधिक सेवन लिवर के विषैले पदार्थ निकालने के कार्य में बाधा डालता है और इसके कारण लिवर के ऊपर वसा की परत जमने लगती है, जो अल्कोहलिक फैटी लिवर की समस्या को उत्पन्न करती है।
पोषक तत्वों की कमी: कई बार पोषक तत्वों जैसे विटामिन ए और विटामिन डी की कमी के कारण क्रॉनिक लिवर डिजीज हो सकती हैं। इसके अलावा गलत खान-पान जैसे कि सोडा, डिब्बाबंद भोजन, नमक और वसा का सेवन भी लिवर रोग का कारण बन सकता है।
मोटापा: अधिक मोटापे के कारण लिवर में चर्बी का जमाव होने लगता है, जिसकी वजह से नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग होने की संभावना बढ़ सकती है।
अन्य कारण: शरीर पर टैटू बनवाने, असुरक्षित यौन संबंध, दूसरे लोगों के रक्त या फिर शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से भी लिवर में संक्रमण हो सकता है।

कुछ बीमारियों से भी लिवर रोग का जोखिम

कुछ बीमारियों के कारण लिवर रोग का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसी कुछ बीमारियां, जिनके कारण लिवर रोग होने की संभावना बढ़ जाती है-

पित्त नली का कैंसर: जब पित्त नलिका में कैंसर हो जाता है तो यह लिवर में भी फैलने लगता है, जिससे लिवर को कार्य करने में बाधा आती है।
लिवर कैंसर: जब कैंसर कोशिकाएं लिवर में फैलने लगती हैं और बड़ी होने लगती हैं तो यह लिवर के कार्य को बुरी तरह प्रभावित करती हैं, जिससे लिवर डैमेज होने लगता है।
डायबिटीज: टाइप 2 डायबिटीज के कारण रक्त शर्करा ( ब्लड शुगर) बढ़ जाती है, जिससे लिवर को अधिक शुगर संरक्षित करके रखने में परेशानी होती है। इससे लिवर डैमेज होने लगता है।

जन्मजात बीमारियां भी हैं एक कारण

लिवर में होने वाली बीमारियां जन्मजात भी हो सकती हैं। अगर परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी लिवर की समस्या रही है तो यह अगली पीढ़ी में भी देखी जा सकती है। कुछ अनुवांशिक बीमारियां, जो लिवर डैमेज का कारण बनती हैं-

हेमोक्रोमेटोसिस: जब व्यक्ति के लिवर और अन्य अंगों में आयरन इकट्ठा हो जाता है तो इससे लिवर को क्षति पहुंचती है और वह अपना कार्य ठीक से नही कर पाता है।

विल्सन रोग: विल्सन रोग में हृदय, मस्तिष्क और लिवर में अधिक मात्रा में कॉपर इकट्ठा होने लगता है, जिसकी वजह से लिवर में समस्या उत्पन्न हो जाती है।

अल्फा -1 एंटीट्रिप्सिन की कमी: जब शरीर में एंटीट्रिप्सिन एएटी नाम का प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाता है तो लिवर रोगग्रस्त हो जाता है।

इंफेक्शन से भी हो सकती है समस्या

कई बार लिवर में इन्फेक्शन होने की वजह से भी लिवर रोग हो सकता है। कुछ परजीवी (पैरासाइट्स) लिवर को संक्रमित कर सकते हैं, जिसकी वजह से लिवर में सूजन हो सकता है। लिवर में होने वाले संक्रमण इस प्रकार हैं-

हेपेटाइटिस ए: यह संक्रमण दूषित पानी या फिर भोजन से हो सकता है। उपयुक्त उपचार मिलने पर यह कुछ सप्ताह में या फिर महीनों में ठीक हो सकता है।
हेपेटाइटिस बी: हेपेटाइटिस बी संक्रमण एक्यूट या फिर क्रॉनिक दोनों तरह का हो सकता है। यह मुख्य रूप से रक्त और वीर्य के माध्यम से फैलता है‌। इसके अलावा हेपेटाइटिस बी असुरक्षित यौन संबंध बनाने के कारण भी फैल सकता है।
हेपेटाइटिस सी: संक्रमित रक्त के संपर्क में आने से हेपेटाइटिस सी संक्रमण हो सकता है। ऐसे में उपयुक्त उपचार न मिलने पर लिवर डैमेज होने लगता है।

ऑटो इम्यून डिजीज

जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली लिवर के ऊतकों को नष्ट करने लगती है तो लिवर को कार्य करने में परेशानी होती है और कई गंभीर लक्षण देखने को मिल सकते हैं। कुछ मुख्य ऑटो इम्यून लिवर की बीमारियां इस प्रकार हैं-

ऑटो इम्यून हेपिटाइटिस: लिवर को प्रभावित करने वाला यह एक ऐसा रोग है, जिसमें रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली लिवर पर हमला कर देती है। इसके कारण लिवर के ऊतक नष्ट होने लगते हैं।

प्राइमरी बिलियरी कोलेंजाइटिस: यह ऑटो इम्यून क्रॉनिक लिवर रोग है, जिसमें पित्त की नलिका डैमेज हो जाती है और अंततः लिवर सिरोसिस की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

प्राइमरी स्केलेरोसिंग कोलेंजाइटिस: इस क्रॉनिक बीमारी में लिवर के अंदर और बाहर की पित्त वाहिकाएं सूज जाती हैं और धीरे-धीरे ब्लॉक हो जाती हैं। इससे लिवर में बनने वाला पित्त लिवर को डैमेज करता है।

लिवर रोग का इलाज

लिवर रोग का इलाज इस बात के ऊपर निर्भर करता है कि रोगी को लिवर की कौन सी बीमारी है, क्योंकि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या अलग-अलग हो सकती है। लिवर रोग का इलाज करने के लिए कई प्रकार के उपाय अपनाए जा सकते हैं-

जीवन शैली में बदलाव

लिवर रोग होने के पीछे गलत जीवनशैली भी काफी हद तक जिम्मेदार होती है, लेकिन अगर इसमें बदलाव किया जाए तो लिवर की बीमारी से बचा जा सकता है-

खान-पान: स्वस्थ खान-पान रखने से लिवर को अधिक कार्य नहीं करना पड़ता है, जिससे लिवर भी स्वस्थ रहता है। खान-पान में फाइबर युक्त चीजें, ताजे फल विशेषकर खट्टे फल और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करने से लिवर को लाभ मिलता है।

वजन नियंत्रण: वजन को नियंत्रित रखने से लिवर में फैट नहीं जम पाता है, जिससे फैटी लिवर जैसा रोग नही होता है।

शराब और अल्कोहलिक पदार्थ का निषेध: शराब में विषाक्त पदार्थ होते हैं, जो शरीर के लिए हानिकारक होते हैं। इन विषाक्त पदार्थों को निकालने में लिवर को अधिक कार्य करना पड़ता है। इसलिए लिवर रोग से बचने के लिए शराब या नशीले पदार्थों का सेवन नही करना चाहिए।

व्यायाम: नियमित रूप से एरोबिक एक्सरसाइज और योगासन करने से लिवर सहित शरीर के सभी अंगों में रक्त का बहाव अच्छा रहता है। इसलिए दैनिक रूप से व्यायाम करना चाहिए।

लिवर काे स्वस्थ रखने के घरेलू उपाय

लिवर रोग में कई प्रकार के प्राकृतिक उपाय अपनाए जा सकते हैं, जिनसे लिवर रोग को कम किया जा सकता है। कुछ निम्नलिखित घरेलू उपाय इस प्रकार हैं-

हल्दी: हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते हैं। कम वसा वाले दूध में हल्दी मिलाकर पीने से लिवर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं।

पपीते के बीज: पपीते के बीजों के इस्तेमाल से लिवर में चर्बी का जमाव कम होता है, जो फैटी लिवर के रोगियों के लिए अच्छा उपाय है।

खट्टे फल: खट्टे फलों में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में (डिटॉक्सिफाई) मदद करते हैं।

कॉफी का सेवन: कॉफी पीने से लिवर रोगों का विकास धीमा हो जाता है और लिवर डैमेज कम होता है।

ग्रीन टी: ग्रीन टी सिर्फ लिवर के लिए ही नहीं बल्कि पूरे शरीर के लिहाज से फायदेमंद है। इसमें कैटेचिन मिश्रण होता है, जो लिवर में फैट के जमाव को रोकता है और कोलेस्ट्राल के स्तर को भी कम करता है।

नॉन सर्जिकल उपचार

लिवर रोग जब थोड़े गंभीर हो जाते हैं तो घरेलू उपायों से आराम नही मिल पाता है। ऐसे में नॉन सर्जिकल उपचार जैसे दवाइयां और इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है, जो निम्न हैं-
लिवर रोग की गंभीरता के आधार डॉक्टर कुछ दवाइयां जैसे लैक्टुलोज, रिफाक्सिमिन, स्पाइरोनोलैक्टोन, फ्युरोसेमाइड और ट्राइमोक्साजोल लेने की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा ओवर द काउंटर मिलने वाले मल्टी विटामिन और मिनरल के सप्लीमेंट लिए जा सकते हैं, लेकिन इनका उपयोग बिना डॉक्टर की सलाह के कभी नहीं करना चाहिए। लिवर रोग खासकर ऑटो इम्यून हैपेटाइटिस में कोर्टिकोस्टेरॉइड को इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इस इंजेक्शन को लिवर ट्रांसप्लांट के बाद भी दिया जाता है।

सर्जिकल उपचार

जब लिवर रोग घरेलू उपायों, दवाइयों और नॉन सर्जिकल तरीकों से ठीक नहीं हो पाता है तो डॉक्टर सर्जिकल प्रक्रिया से लिवर रोग को ठीक करने की कोशिश करते हैं। आमतौर पर लिवर रोग में निम्नलिखित सर्जरी का इस्तेमाल किया जाता है-

हेपेटेक्टॉमी: इस सर्जरी में लिवर के किसी एक हिस्से में हुए कैंसरजनित ट्यूमर को निकाल दिया जाता है। बाकी बचा हुआ लिवर पूरे लिवर का कार्य करता है। हेपेटेक्टॉमी के कुछ हफ्तों बाद लिवर वापस अपने सामान्य आकार में आ सकता है।

लिवर ट्रांस्प्लांट: जब लिवर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाता है यानी कि लिवर फेल हो जाता है तो ऐसे में ट्रांसप्लांट सर्जन द्वारा लिवर ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। लिवर ट्रांसप्लांट के माध्यम से खराब लिवर को निकालकर उसकी जगह स्वस्थ लिवर प्लांट किया जाता है।

लिवर रोग में परहेज

लिवर रोग से बचने के लिए जरूरी है कि कुछ चीजों का परहेज किया जाए ताकि लिवर स्वस्थ बना रहे और सुचारू रूप से काम कर सके। इसलिए निम्नलिखित चीजों का परहेज किया जाना चाहिए-

शराब और दूसरे नशीले पदार्थ का प्रयोग नहीं करना चाहिए। शुगर वाली चीजें जैसे मिठाइयां, आलू इत्यादि का सेवन अधिक नही करना चाहिए। नमक का बहुत अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। वसायुक्त आहार जैसे रेड मीट, फ्राइड फूड, मलाईदार दूध, आइसक्रीम इत्यादि लेने से बचना चाहिए। हमेशा सोने या बैठने से परहेज करना चाहिए और शारीरिक रूप से सक्रिय रहना चाहिए।

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