सस्ते हो सकते है लैपटॉप और कई इलेक्ट्रॉनिक आइटम

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने “भारत में सेमीकंडक्टर के विकास और डिस्प्ले विनिर्माण इकोसिस्टम कार्यक्रम” में संशोधन को मंजूरी दी

विभिन्न प्रौद्योगिकी नोड्स के सेमीकंडक्टर फैब के साथ-साथ कंपाउंड सेमीकंडक्टर, पैकेजिंग और अन्य सेमीकंडक्टर सुविधाओं के लिए 50 प्रतिशत प्रोत्साहन

नई दिल्ली. भारत में अगले कुछ महीनों बाद लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक आइटम सस्ते हो सकते हैं इसका प्रमुख कारण केंद्र सरकार की नई सेमीकंडक्टर नीति है। गौरतलब है कि सेमीकंडक्टर का उपयोग लैपटॉप सहित इलेक्ट्रॉनिक आइटम और उत्पादो में भी किया जाता है। इससे वाहनों की कीमत पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। क्योंकि वाहनों में भी आजकल सेमीकंडक्टर चिप का उपयोग किया जाता है। हाईटेक उपकरणों में सेमीकंडक्टर चिप के जरिए ही डाटा की प्रोसेसिंग होती है। इस कारण इसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का दिमाग भी कहा जाता है। कार से लेकर बहुत से इलेक्ट्रॉनिक आइटम में इसका उपयोग किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल ने 21 सितंबर को भारत में सेमीकंडक्‍टर के विकास और डिस्प्ले विनिर्माण इकोसिस्टम कार्यक्रम में निम्‍नलिखित संशोधनों को मंजूरी दी है:

(i) भारत में सेमीकंडक्टर फैब की स्थापना की योजना के तहत सभी प्रौद्योगिकी नोड्स के लिए परियोजना लागत के 50 प्रतिशत की समानता के आधार पर वित्तीय सहायता।

(ii) डिस्प्ले फैब स्थापित करने की योजना के तहत परियोजना लागत के 50 प्रतिशत की समानता के आधार पर वित्तीय सहायता।

(iii) भारत में कंपाउंड सेमीकंडक्टर/सिलिकॉन फोटोनिक्स/सेंसर फैब और सेमीकंडक्टर एटीएमपी/ओएसएटी सुविधाओं की स्थापना के लिए योजना के तहत पूंजीगत व्यय के 50 प्रतिशत की समानता के आधार पर वित्तीय सहायता। इसके अतिरिक्त, योजना के तहत लक्षित प्रौद्योगिकियों में डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर फैब्स भी शामिल होंगे।

संशोधित कार्यक्रम के तहत, सभी प्रौद्योगिकी नोड्स के लिए सेमीकंडक्टर फैब की स्थापना की परियोजना लागत के 50 प्रतिशत हिस्से की वित्तीय सहायता समानता के आधार पर प्रदान की जाएगी। कंपाउंड सेमीकंडक्टर और उन्नत पैकेजिंग की विशिष्ट प्रौद्योगिकी एवं प्रकृति को देखते हुए, संशोधित कार्यक्रम; कंपाउंड सेमीकंडक्टर/सिलिकॉन फोटोनिक्स/सेंसर/डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर फैब और एटीएमपी/ओएसएटी की स्थापना के लिए योजना के तहत पूंजीगत व्यय के 50 प्रतिशत की समानता के आधार पर वित्तीय सहायता।

इस कार्यक्रम ने भारत में फैब स्थापित करने के लिए कई वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों को आकर्षित किया है। संशोधित कार्यक्रम से भारत में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण के निवेश में तेजी आयेगी। संभावित निवेशकों से चर्चा के आधार पर, यह उम्मीद की जाती है कि पहली सेमीकंडक्टर सुविधा स्थापित करने का काम जल्द ही शुरू हो जाएगा।

भारत सेमीकंडक्टर मिशन, जो भारत में सेमीकंडक्टर के विकास और डिस्प्ले विनिर्माण इकोसिस्टम कार्यक्रम के लिए नोडल एजेंसी है, को सलाह देने के लिए उद्योग जगत और शिक्षा जगत के वैश्विक विशेषज्ञों की एक सलाहकार समिति का गठन किया गया था। सलाहकार समिति ने सर्वसम्मति से सिलिकॉन सेमीकंडक्टर फैब/सिलिकॉन फोटोनिक्स/सेंसर/डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर फैब्स और एटीएमपी/ओएसएटी के सभी प्रौद्योगिकी नोड्स के लिए एकसमान समर्थन की सिफारिश की है, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। 45एनएम और उससे अधिक के प्रौद्योगिकी नोड्स की मांग, अन्य के साथ-साथ वाहन, विद्युत और दूरसंचार अनुप्रयोगों के कारण अधिक है। इसके अलावा, यह हिस्सा कुल सेमीकंडक्टर बाजार का लगभग 50 प्रतिशत है।

सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले फैब योजना में बदलाव, सभी को मिलेगा 50 प्रतिशत प्रोत्साहन

सरकार ने बुधवार को सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले बनाने वाली कंपनियों के लिए 76,000 करोड़ की प्रोत्साहन योजना में बदलाव किया है। इसके तहत सभी श्रेणियों के कारखानों को परियोजना लागत की 50 फीसदी की एक समान वित्तीय मदद दी जाएगी। इस से पहले अलग-अलग श्रेणियों के लिए 30-50% प्रोत्साहन देने का प्रावधान था।

नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार न केवल अत्याधुनिक कंप्यूटिंग चिप्स बल्कि बिजली, दूरसंचार व मोटर वाहन जैसे क्षेत्रों में इस्तेमाल सेमीकंडक्टर फैब की स्थापना के लिए सभी प्रौद्योगिकी नोड्स में परियोजना लागत का 50 फीसदी प्रोत्साहन देगी। वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि पैकेज के लिए कुल खर्च पहले जितना ही रहेगा, लेकिन 50% प्रोत्साहन से सेमीकंडक्टर नीति बेहद प्रतिस्पर्धी हो जाएगी। इससे सिलिकॉन, कंपाउंड फैब, पैकेजिंग इकाइयों, डिस्प्ले फैब, डिजाइन व नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को अत्यधिक बढ़ावा मिलेगा।

आएगा दो लाख करोड़ का निवेश

केन्द्रीय मंत्री चंद्रशेखर ने कहा, वैश्विक कंपनियां सेमीकंडक्टर के लिए व्यावहारिक निवेश गंतव्य के रूप में भारत के नाम पर विचार कर रही हैं। इन संशोधनों से इंटेल जैसी वैश्विक कंपनियों को भारत में विनिर्माण इकाई की स्थापना के लिए आकर्षित किया जा सकेगा। इससे देश में आयात निर्भरता कम होगी और दो साल में करीब दो लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा एवं रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। संभावित निवेशकों से चर्चा के आधार पर उम्मीद है कि जल्द ही पहले सेमीकंडक्टर संयंत्र को स्थापित करने का काम भी शुरू हो जाएगा।

एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण

केन्द्रीय मंत्री राजीव चन्द्रशेखर ने कहा कि हम चाहते हैं कि डिजाइन से लेकर विनिर्माण, पैकेजिंग और परीक्षण तक, पूरा एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र यहां मौजूद हो। जोखिम यह था कि हमारे पास फैब होते और फिर पैकेजिंग कहीं और होती। हम नहीं चाहेंगे कि ऐसा स्थिति हो। हम चाहते हैं कि अगर फैब यहां हैं तो पैकेजिंग भी यहां हो।

पिछले साल दिसंबर में घोषित उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन या पीएलआई योजना ने भारत में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए विभिन्न श्रेणियों को अलग-अलग वित्तीय सहायता देने की पेशकश की थी। ये सहायता 30-50 प्रतिशत के बीच थी।
सरकार ने इसे एक समान कर दिया गया है। सरकार न केवल अत्याधुनिक कंप्यूटिंग चिप्स बल्कि बिजली, दूरसंचार और मोटर वाहन जैसे क्षेत्रों में उपयोग किए जाने वाले सेमीकंडक्टर फैब की स्थापना के लिए सभी प्रौद्योगिकी नोड्स में परियोजना लागत का 50 प्रतिशत प्रोत्साहन देगी।

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