जाने जर्मनी में डायरेक्ट नर्सिंग के लाभ

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ई लैंग्वेज स्टूडियो की ओर से ऑनलाइन सेमिनार आयोजित

जयपुर। ई लैंग्वेज स्टूडियो और जर्मन स्पीकर्स क्लब की ओर से जर्मनी में डायरेक्ट नर्सिंग को लेकर एक ऑनलाइन सेमिनार आयोजित किया गया। इस सेमिनार में राजस्थान के डीडवाना से जर्मनी गए मेल नर्स गणेश शर्मा और ऑस्बिल्डुंग नर्सिंग में गए हरमन सिंह ने भी भाग लिया और जर्मनी जाने की इच्छा रखने वालों के सवालों का जवाब दिया।
इस ऑनलाइन सेमिनार को शुरू करते हुए ई लैंग्वेज स्टूडियो के डायरेक्टर देवकरण सैनी ने बताया कि जर्मनी में डायरेक्ट नर्सिंग में काफी अवसर है और हमारी ओर से इसमें जाने वालों का सहयोग किया जाता है। इसके लिए न्यूनतम जर्मन भाषा का बी वन का सर्टिफिकेट होना जरूरी है और जर्मनी जाकर बी टू का कोर्स किया जाना आवश्यक है। आप चाहे तो भारत से भी बी टू का कोर्स करके जा सकते हैं। बी वन या बी 2 का सर्टिफिकेट 1 साल से पुराना नहीं होना चाहिए और यह गोएथे, ईसीएल या टेल्क का होना चाहिए।
बी वन करने के बाद प्रक्रिया में लगभग 4 से 5 महीने तक लग जाते हैं और बी टू के बाद तुरंत अप्लाई करें तो 3 महीने में भी हो सकता हैं। न्यूनतम 4 से 5 महीने प्रक्रिया में लगते ही हैं। जो भी हमारे यहां से लैंग्वेज कोर्स करके जाएंगे उनकी लैंग्वेज फीस जर्मनी जाने पर वापस लौटा दी जाएगी। डायरेक्ट नर्सिंग में जाने वालों का वीजा और फ्लाइट का खर्च भी नहीं लगता है। दूसरे प्रतिभागियों से केवल प्रोफाइल और प्रोसेस की फीस ही लगेगी।
जर्मनी में ऑस्बिल्डुंग कर रहे हरमन सिंह ने बताया कि भारत से ही बी 2 करना अच्छा रहता है। यहां आने वालों को रिसीव करने के लिए एम्पलॉयर का ही प्रतिनिधि आता है। इसके साथ ही रहने की व्यवस्था भी होती है लेकिन उसका खर्च अलग से उठाना पडता है। यहां रहने के लिए स्वयं को खाना बनाना आना चाहिए। यह यहां आने वाले के लिए अच्छा रहता है।
जर्मनी के म्यूनिख शहर के पास एक टाउन में ओल्ड ऐज होम में काम करने वाले नर्स गणेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि जर्मन लैंग्वेज का बी 2 तो करना ही पड़ेगा। जर्मनी से करने की बजाय अगर भारत से ही बी 2 करके आए तो बढ़िया रहेगा। यहां अस्पताल और ओल्ड एज होम की सैलरी में कोई अंतर नहीं है। अच्छा यही रहता है कि जो नए लोग आ रहे हैं वह पहले ओल्ड एज होम में एक-दो साल काम कर ले तो फिर लैंग्वेज का अनुभव होने पर अस्पताल में भी काम कर सकते हैं। अस्पताल की अलग अलग विंग में भी काम करने और आगे बढ़ने के लिए अलग अलग कोर्स कर सकते हैं।
पार्ट टाइम करने के सवाल पर गणेश शर्मा ने कहा कि 6 महीने तक दूसरी जगह काम नहीं कर सकते हैं। क्योंकि इसे सही नहीं माना जाता और प्रोबेशन पीरियड में अपने काम पर ही ध्यान देना चाहिए। 6 महीने के बाद आप अपने हॉस्पिटल या अन्य संस्थान से परमिशन लेकर अतिरिक्त समय में काम कर सकते हैं। शनिवार रविवार को काम कर सकते हैं और पब्लिक होली डे को काम करने पर डबल सैलरी मिलती है।
इस ऑनलाइन सेमिनार में देश और विदेश के लगभग 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया और अपने सवालों के उत्तर प्राप्त किए।

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