दो साल बाद फिर शुरू हुई कांवड़ यात्राएं

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सावन में रहेगी बम बम भोले की गूंज
दिल्ली में ड्रोन से होगी निगरानी


जयपुर.
हिंदी पंचांग के अनुसार आज से सावन महीने की शुरुआत हो गई है। सावन हिंदी कैलेंडर के अनुसार साल का पांचवा महीना होता है। पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का काफी महत्व है। सावन में भगवान शिव की विशेष कृपा होती और इसलिए पूरे देश में शिवालयों में पूरे महीने पूजा अर्चना चलती है। इसके अलावा सावन के सोमवार का व्रत और भगवान शिव को जल चढ़ाने की भी मान्यता है। भगवान शिव को समर्पित महीने में गंगा जल से शिव का अभिषेक फलदायी माना जाता है।
सावन में कांवड़ यात्रा का भी खास महत्व है। कोरोना के बाद करीब दो साल आज देश के कई हिस्सों में कांवड़ यात्रा की शुरुआत हो गई है। कांवड़ यात्रा में भक्त पवित्र जलाभिषेक हेतु सुदूर स्थानों से जाकर कांवड़ में गंगाजल भरकर ले आते है उन्हें कावडि़ए कहा जाता है। उस गंगाजल से सावन मास की चतुर्दशी के दिन शिव मंदिरों में शिव का अभिषेक किया जाता है। इस संपूर्ण यात्रा को कावड़ यात्रा कहा जाता है।
यात्रा के दौरान असुविधा ना हो और यातायात संबंधी दिक्कत ना आए इसका सरकार उचित प्रबंध करती है। आम जनमानस की सुविधा के साथ-साथ कावडयि़ों के भी सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाता है। कई जगह सुविधानुसार रूट डायवर्जन कर दिया गया है। गैर सरकारी सामाजिक संगठन भी इस गर्मी के मौसम में जगह-जगह कावडिय़ों के विश्राम, जलपान आदि की व्यवस्था कर सहयोग दे रहे हैं।
वहीं दो साल के बाद आज से कावड़ यात्रा शुरू हो गई। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार और प्रशासन ने सुरक्षा के बंदोबस्त कर लिए हैं। दिल्ली में इस बार ड्रोन से भी नजर रखी जायेगी। इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस द्वारा ईस्टर्न रेंज में इसको लेकर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
कांवड़ यात्रा को देखते हुए बीती देर शाम गाजियाबाद पुलिस एवं दिल्ली पुलिस के बीच कोऑर्डिनेशन मीटिंग दिल्ली स्थित डीसीपी उत्तर पूर्वी के कार्यालय पर आयोजित की गई। मीटिंग में कांवड़ यात्रा को देखते हुए कानूनध् सुरक्षा व्यवस्था तथा यातायात व्यवस्था के संबंध में वार्ता की गई एवं आपसी सहयोग व समन्वय बनाने हेतु चर्चा की गई।
राजस्थान में भी पुष्कर, जयपुर के गलता तीर्थ साहित अनेक तीर्थ स्थानों से जल लाकर कांवड़ यात्री अपने अपने निकट के शिव मंदिरों में जल चढ़ाते है और भगवान शिव से सभी के मंगल की कामना करते है।

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