जोधपुर के डॉक्टर की सेवा का जांबिया में डंका

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जांबिया सरकार ने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा

माया शर्मा
जोधपुर, 2 जून।
जहां एक ओर चिकित्सा जैसे सेवा के पेशे को कुछ लालची लोग बदनाम करने में जुटे हैं तो वहीं आज भी कुछ डॉक्टर ऐसे हैं जो अपनी सेवा के बूते देश ही नहीं वरन् देशों में भी अपना परचम फहरा रहे हैं। ऐसे ही एक डॉक्टर हैं मूल रूप से जोधपुर के रहने वाले डॉ. गौतम कुमार जैन, जिन्होंने सात समंदर पार अपनी चिकित्सा क्षेत्र में सेवा के बूते प्रदेश ही नहीं, देश का नाम ऊंचा किया है। डॉ. जैन ने जांबिया में 45 साल अपनी सेवाएं दी हैं। इनके सेवा के जज्बे को देखते जांबिया के राष्ट्रपति ने न केवल इन्हें वहां के सर्वोच्च पुरस्कार वीरता पदक से नवाजा, बल्कि शहर की एक सडक़ का नामकरण भी डॉ. गौतम के नाम से कर दिया है। संभवतया यह पहला मामला होगा, जब जांबिया ने किसी भारतीय को अपने देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देकर नवाजा है।

इंग्लैण्ड रास नहीं आया तो चले गए जांबिया

हमारे देश से ज्यादातर लोग विदेश में पैसा कमाने के लिए जाते हैं। वहीं जोधपुर में जन्मे डॉ. गौतम जैन ने मानवता की सेवा करने के लिए अपने जीवन के 45 साल जांबिया में बिताए। उनकी सेवाओं को देखते हुए ही जांबिया के राष्ट्रपति ने उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान दिया। वहीं उनके कार्यकाल के बाद एक सडक़ का नामकरण भी डॉक्टर जैन के नाम से किया। डॉ. गौतम कुमार जैन की प्रारंभिक शिक्षा जोधपुर के सरकारी स्कूल में हुई। मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने सरकारी सेवा जॉइन की, लेकिन यह नौकरी उन्हें रास नहीं आई और नौकरी छोडक़र वे इंग्लैण्ड चले गए। इंग्लैण्ड में भी उनका मन ज्यादा दिन नहीं लगा। इसके बाद वो जांबिया चले गए। जांबिया उनके मन को भा गया और उन्होंने अपने जीवन के बहुमूल्य 45 वर्ष यहां के लोगों की सेवा में लगा दिए।

मरीजों को बचाने के लिए खेल गए जान पर

डॉ. गौतम कुमार जैन सर्जरी के स्पेशलिस्ट हैं। जांबिया में सरकारी सेवा के दौरान उनका ट्रंासफर माम्बा अस्पताल में हुआ। यहां 11 फरवरी 1989 को बारिश के दौरान उनके अस्पताल में पानी भर गया। इस दौरान अस्पताल में 10 मरीज भर्ती थे। उन्होंने खुद की जान जोखिम में डालकर अस्पताल में भर्ती 10 मरीजों की जान बचाई। इसके घटना के 13 साल बाद जांबिया की सरकार ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान से नवाजा।

पत्नी भी हैं पेशे से चिकित्सक

डॉक्टर जैन की उत्कृष्ट सेवाओं के चलते जांबिया की जनता ने भी उन्हें अपार स्नेह दिया। उनकी सेवाओं को देखते हुए ही जांबिया सरकार ने भी उन्हें प्रेसिडेंट गैलेंट्री मेडल देकर उन्हें सम्मानित किया। डॉ. जैन के इस सफर में स्त्री रोग विशेषज्ञ उनकी धर्मपत्नी ने भी भरपूर साथ दिया। जांबिया सरकार की सेवा से रिटायरमेंट के बाद अब डॉ. जैन वापस अपने वतन आ गए हैं।

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