वर्ष 1991 से मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस

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यूनेस्को ने लिया था मनाने का निर्णय


जयपुर.
अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय यूनेस्को की ओर से लिया गया था। इसके लिए ही पुरस्कार भी दिया जाता है। सोशल मीडिया के जमाने से पहले प्रेस ही वह माध्यम था जो देश और दुनिया में चल रहे मुद्दों और खबरों को हम तक पहुंचाता था। प्रेस और मीडिया एक खबर वाहक का काम करती हैं।
प्रेस एक समाज का दर्पण होता है जो यह दर्शाता है कि देश में अभिव्यक्ति को कितनी स्वतंत्रता प्रदान की गई है। एक लोकतांत्रिक देश जैसे भारत के परिवेश में प्रेस की स्वतंत्रता एक मौलिक आवश्यकता है। मीडिया और प्रेस समाज या देश में हो रही घटनाओं की जानकारी हम तक पहुंचाते हैं। जिससे हम दुनिया से जुड़े रहते हैं और यह जानकारी जितनी स्वतंत्र रूप से प्रस्तुत की जाएगी उतना ही हम सच्चाई की तह तक पहुंचेंगे।
भारतीय संविधान में भी अनुच्छेद 19 में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मूल अधिकार के रूप में देने का प्रावधान है। विश्व स्तर पर भी इस स्वतंत्रता का महत्व उतना ही है यानि विश्व स्तर पर प्रेस की आजादी को सम्मान देने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा द्वारा प्रतिवर्ष 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है। यूनेस्को द्वारा 1997 से हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर गिलेरमो कानो वल्र्ड प्रेस फ्रीडम प्राइज भी दिया जाता है। व्यक्ति अथवा संस्थान जिसने प्रेस की स्वतंत्रता के लिए उल्लेखनीय कार्य किया हो उसे इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।
यूनेस्को संयुक्त राष्ट्र के जन सूचना विभाग में 1991 में इस दिवस को मनाने का निर्णय लिया जो मीडिया की आजादी के और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के उद्देश्य से मनाया जाना था। यहां पर मीडिया की आजादी का मतलब है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी राय कायम करने और सार्वजनिक तौर पर इसे जाहिर करने का अधिकार है।
आरएसएफ यानि कि रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स पेरिस में स्थित है। यह 180 देशों में मीडिया स्वतंत्रता के स्तर का मूल्यांकन करता है और प्रतिवर्ष एक विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक डब्ल्यू पी एफ आई प्रकाशित करता है। सूचकांक में मापदंडों पर स्कोर की गणना की जाती है। बहुलवाद, मीडिया की स्वतंत्रता, मीडिया पर्यावरण और आत्म सेंसरशिप, विधायी ढांचा, पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता जो समाचार और सूचना के उत्पादन का समर्थन करती है। इसमें पत्रकारों के खिलाफ दुव्र्यवहार और हिंसा के कार्य का मात्रात्मक डाटा भी ध्यान में रखा जाता है।

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