विकास देखना है तो जयपुर से बाहर आइए, आंखे फटी रह जाएंगी

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विकास शर्मा
जमवारामगढ़ (जयपुर)।
राजस्थान की राजधानी जयपुर से चंद किलोमीटर की दूरी पर विकास की बातें बेमानी सी नजर आ रही हैं। जयपुर के आस-पास के इलाकों में आज भी टूटी सडक़ें और आवागमन के साधनों का अभाव जन प्रतिनिधियों के विकास के दावों की पोल खोल रहा है। इसकी एक बानगी विधानसभा क्षेत्र जमवारामगढ़ की सडक़ों पर देखी जा सकती है। यहां यातायात के साधनों के अभाव में लोग जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को विवश हो रहे हैं तो पुलिस प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। रामगढ़ बांध से नकची घाटी तक सडक़ की हालत यह है कि यहां सडक़ कम गड्ढे ज्यादा नजर आते हैं। वर्षों से इस सडक़ की हालत खस्ता है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।

मजबूर हैं मजदूरी करने वाले

नियमों का पालन करवाने वाली पुलिस और यातायात विभाग के अफसरों के सामने ही वाहनों में यात्री ठूंस – ठूंस कर भरे जा रहे हैं व बेलगाम वाहन दौड़ रहे हैं। इनसे कभी भी हादसा हो सकता है। आए दिन हो रही सडक़ दुर्घटनाओं के बाद भी प्रशासन कोई कदम नहीं उठा रहा है। आसपास के गांवों जैसे नाभावाला, डांगरवाड़ा, सरपुरा, आंधी, धुलारावजी, सानकोटड़ा, रायसर से काम पर जाने वाले राहगीरों व पढऩे वाले छात्रों को अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है । सडक़ें भी पूरी तरह से टूटी पड़ी हैं, जिनसे कभी भी हादसा हो सकता है। आवागमन के साधनों की व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले ग्रामीणों को मजदूरी की तलाश में जयपुर व आस-पास के बड़े कस्बों में जाने के लिए अवैध रूप से संचालित वाहनों में यात्रा करनी पड़ रही है। वहीं स्थानीय प्रशासन का कहना है कि जल्द ही यातायात व्यवस्था ठीक कर व सरकार की तरफ से अतिरिक्त रोडवेज बसों का संचालन कर इस समस्या का समाधान किया जाएगा। पुलिस प्रशासन के द्वारा भी समय – समय पर ओवर लोडिंग वाहनों पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन हालात फिर से वही बन जाते हैं।

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