मंत्री रह चुके भी सीख रहे है जर्मन

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रोजगार के लिए बनी बड़ी जरूरत


जयपुर.
पेशेवर कौशल के साथ ही रोजगार पाने के लिए जर्मन भाषा रोजगार पाने के लिए कितनी जरूरी है यह एक बार फिर यूरोप से सामने आई है। अफगानिस्तान में तालिबान संकट के बाद जर्मनी में अफगानिस्तान के मंत्री रह चुके पिज्जा डिलीवरी कर रहे है। पूर्व मंत्री सैयद अहमद शाह सादात को मजबूरी में यह काम करना पड़ रहा है क्योंकि उनके पास ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की दो डिग्रियां होने के बावजूद उन्हें जर्मनी में काम नहीं मिल पाया। उन्होंने 22 साल तक दुनिया के कई देशों में काम किया लेकिन अब जर्मन भाषा सीख रहे है ताकि वहां उन्हें अच्छा काम मिल जाए। इससे साफ है कि जर्मनी में रोजगार की असीम संभावनाएं है लेकिन सबसे पहली अनिवार्यता जर्मन भाषा की जानकारी होना है। जर्मन भाषा की जानकारी और पेशेवर दक्षता हो तो वहां रोजगार ही रोजगार है। जर्मन स्पीकर्स क्लब के संयोजक देवकरण सैनी ने बताया कि जर्मन भाषा साल भर में आसानी से सीखी जा सकती है। इस भाषा को सीखते ही देश में और जर्मनी सहित पूरे यूरोप में रोजगार की संभावनाएं बहुत बढ़ जाती है। जर्मनी में विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वालों की मांग बनी हुई है। चाहे कॉरपोरेट सेक्टर हो या मेडिकल क्षेत्र, शिक्षा हो या अन्य सेक्टर सभी में जर्मन भाषा की अनिवार्यता है। बिना जर्मन भाषा सीखे वहां रोजगार नहीं मिल सकता है। इसलिए रोजगार की इच्छा रखने वाले युवाओं को जर्मन भाषा सीखनी चाहिए ताकि उनके लिए एक बड़ा संभावनाओं का क्षेत्र खुल जाए और वे अपने कॅरिअर को नई ऊंचाइयां दे सके।
जर्मनी में काम करने के लिए जर्मन भाषा ही जरूरी है वहां अंगे्रजी की इतनी आवश्यकता नहीं पड़ती है। जर्मनी का पूरा प्रशासनिक तंत्र जर्मन भाषा में ही काम करता है इस कारण इसके बिना वहां सफलता नहीं पाई जा सकती है। विशेषकर जर्मन सीख कर गए छात्रों का प्लेसमेंट करना आसान हो गया है। ऐसे युवा जो अपना कॅरिअर विश्व स्तरीय बनाना चाहते है उन्हे जर्मन अवश्य सीखनी चाहिए।

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