नौ साल से नीम के पेड़ तले चल रहा सरकारी स्कूल

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भवन बने तो मिले बच्चों को राहत, सरकार का नहीं ध्यान

जमवारामगढ़, 8 मार्च (विकास शर्मा)। एक ओर सरकार नए स्कूल खोल वाहवाही लूट रही है तो दूसरी ओर ऐसे भी स्कूल हैं, जो भवन नहीं होने से खुले आसमां तले चल रहे हैं। ऐसा ही एक स्कूल है राजस्थान की राजधानी से करीब 20 किमी दूर जमवारामगढ़ कीे ग्राम पंचायत राहोरी के गांव रानियांवास में पाट्या की ढाणी स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय।

वर्ष 2013 से खुले में चल रहा स्कूल

वर्ष 2013 से यह स्कूल भवन नहीं होने के कारण नीम के पेड़ के नीचे चल रहा है। यहां पर छोटे-छोटे बच्चे पेड़ के नीचे सर्दी-गर्मी-बरसात को सहते हुए पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ग्राम पंचायत राहोरी की सरपंच बदाम देवी शर्मा ने कई बार सांसद, विधायक व मंत्रियों को विद्यालय के लिए भवन बनाने की गुहार लगाई, लेकिन उनकी मांग को अनसुना कर दिया गया।

सरपंच की गुहार, नहीं सुन रही सरकार

अभी हाल ही में ग्राम पंचायत राहोरी में आयोजित प्रशासन गांवों के संग अभियान में भी सभी अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को भवन निर्माण के लिए ज्ञापन सौंपा गया था। सोमवार को एक बार फिर से स्थानीय सरपंच बदाम देवी शर्मा ने सांसद-विधायक एवं शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर जल्द से जल्द विद्यालय भवन निर्माण कराने की मांग की है।

बच्चों की हालत देख भर आईं आंखें

सोमवार को जब स्थानीय सरपंच ने इस स्कूल का निरीक्षण किया तो बच्चों की हालत देखकर उनकी आंखे भर आई। बच्चे एक पेड़ के पास पानी के टेंकर की छाया में बैठे हुए पढ़ रहे थे। ग्रामीणों ने सरपंच को बताया कि सरकार को स्कूल में अध्यापकों नियुक्ति करने के साथ भवन का निर्माण भी कराना चाहिए, जिससे बच्चों की पढ़ाई का स्तर सुधर सके।

आंदोलन की तैयारी में ग्रामीण

ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल भवन नहीं होने से आस-पास के बच्चे पढऩे के लिए दूसरे गांवों में जाते हैं व इनके भविष्य पर शिक्षण कार्य को लेकर संकट छाया हुआ है। यहां महज एक शिक्षक पदस्थापित है, जो कार्यालय कार्य पूर्ण कर पा रहे है। उन्होंने बताया कि कई बार प्रशासन को अवगत करवाने के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ है। अगर समय रहते भवन निर्माण नहीं हुआ तो ग्रामीणों द्वारा सरकारी कार्यालयों का घेराव कर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

नहीं हुआ भूमि का आवंटन

वर्ष 2013 में शुरू हुए विद्यालय को आज भी स्वयं के भवन का इंतजार है। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते 9 साल गुजरने के बाद भी भूमि आवंटित नहीं हो सकी। इससे विद्यालय गांव वालों के घरों में संचालित है। अध्यापक लालचंद खटीक ने बताया कि गर्मी के दिनों में पेड़ की छांव में विद्यार्थियों को बैठाकर अध्ययन करवाते हैं। अब पेड़ों की छंगाई होने से बच्चों को पानी के टैंकर की छांव में बैठाकर अध्धयन कराने को मजबूर हैं। बारिश में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विद्यालय के कागजात भी गांव के एक मकान में रखवा रखे हैं।

धीरे-धीरे घट गया नामांकन

जानकारी के अनुसार जमवारामगढ़ ब्लॉक की राहोरी ग्राम पंचायत केे रानियावास गांव स्थित पाट्या की ढाणी में वर्ष 2013 में राजकीय प्राथमिक विद्यालय खोला था। उस उस समय विद्यालय में नामांकन 74 था। अब विद्यालय का भवन नहीं होने से परिजन दिनों दिन विद्यार्थियों की टीसी कटवा कर दूसरी जगह पढ़ाने लगे हैं। इस समय सत्र 2021-22 में विद्यार्थियों का नामांकन कम होकर केवल 14 रह गया। इसके चलते अब यह स्कूल बंद होने के कगार पर है।

जमीन आवंटन के लिए कई बार लिखे पत्र -सरपंच

इस संबंध में ग्राम पंचायत राहोरी की सरपंच बदाम देवी का कहना है कि मैंने जब विद्यालय में जाकर देखा तो बच्चे टैंकर की छांव में बैठकर अध्ययन कर रहे थे। विद्यालय के भवन के लिए जमीन आवंटन के लिए मैंने कई बार प्रशासन व शिक्षा विभाग के अधिकारियों व मंत्रियों को पत्र लिखकर अवगत करा दिया, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। मैंने स्थानीय विधायक को भी इसके बारे में अवगत कराया।

शाला दर्पण पर भी दर्ज कराई शिकायत – अध्यापक

विद्यालय के एकमात्र अध्यापक लालचंद खटीक का कहना है कि मैंने हर महीने होने वाली मीटिंग में विद्यालय भवन के बारे में अवगत कराया। शाला दर्पण पर भी कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ। विद्यालय में पहले 74 विधार्थियों का नामांकन था, लेकिन अब धीरे धीरे कम होकर 14 रह गया है। इनको एक ही अध्यापक के द्वारा अध्धयन कराया जाता है।

जानकारी नहीं थी, बनवाएंगे भवन – प्रधान

जमवारामगढ़ पंचायत समिति के प्रधान रामफूल गुर्जर का कहना है कि मामले की जानकारी नहीं है। अगर विद्यालय में भवन नहीं है और विद्यालय खुले में पेड़ के नीचे चल रहा है तो जल्द ही इसको संज्ञान में लेकर भवन के लिए जमीन आवंटित करवाकर भवन निर्माण करवाया जाएगा।

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