शासन – प्रशासन साहित्यकारों के प्रति उदासीन – पहाड़िया

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नागौर 10 फरवरी। राजस्थानी भाषा प्रसार संस्थान के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार पवन पहाड़िया ने शासन एवं प्रशासन पर साहित्यकारों के प्रति उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है ।
पहाड़िया ने कल हुई राजनीतिक नियुक्तियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राजनीतिक स्वार्थो एवं कुर्सी बचाने के लिए सता पक्ष राजनीतिक नियुक्तियां करते हैं ,उनसे जन भावनाओ एवं लोक हितों का कोई लेना – देना नहीं होता , न हीं कोई नैतिक एवं सैद्धान्तिक विचार धारा इसके पिछे होती है यह तो केवल सता एवं कुर्सी को बचाने के लिए कळाप एवं कारनामें होते हैं ।
पहाड़िया ने कहा कि कल ही 44 राजनीतिक नियुक्तियां प्रदेश के मुख्य मंत्री अशोक गहलोत ने की है लेकिन प्रदेश में पिछले सात – आठ वर्षों से ठप्प पड़ी आठ साहित्य अकादमी की ओर तनिक भी ध्यान नहीं गया। प्रदेश के मुखिया के इस निर्णय से यह प्रतीत होता है कि वर्तमान शासन एवं प्रशासन साहित्य एवं साहित्यकारों के प्रति पूर्णतया उदासीन है । शासन के साथ -साथ प्रशासन की भूमिका भी इसमें निंदनीय रही है । आला अफसर ब्यूरोकेसी शासन को साहित्य हित जैसे नैतिक एवं पुनीत कार्यो की तरफ सता पक्ष का ध्यान केंद्रित नहीं करवाते हैं ।
पहाड़िया ने कहा कि बड़े दुःख की बात है कि अनावश्यक योजनाओं पर करोड़ो रूपये सरकार खर्च कर देती है लेकिन आवश्यक अकादमियों के खर्चे पर सरकारें प्रतिबन्ध लगा देती है , इतना ही नहीं राष्ट्रीय पर्वों पर प्रशासन की और से प्रदेश में हजारों कार्मिक सम्मानित किए जाते हैं लेकिन एक भी साहित्यकार को सम्मानित करने का प्रेय एवं श्रेय कार्य प्रशासन नहीं कर पाता है ऐसे हालातों में वर्तमान प्रदेश सरकार से राजस्थानी भासा को प्रदेश में द्वितीय राज – भासा का दर्जा दिलाने की आशा करना व्यर्थ है ।

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