Ganga: मैली हो रही हमारी गंगा मां, छोड़ा जा रहा है सीवेज व गंदा पानी

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नई दिल्ली। गंगा को निर्मल करने के लिए चलाए गए नमामि गंगे जैसे प्रोजेक्ट इसे निर्मल करने में नाकामयाब होते नजर आ रहे है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा है कि दशकों की निगरानी के बाद भी सीवेज और गंदा पानी गंगा नदी में छोड़ा जा रहा है। इससे लगता है कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) भी अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो रहा है।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदेश कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर राष्ट्रीय गंगा परिषद (एनजीसी) से कार्रवाई रिपोर्ट मांगते हुए कहा कि गंगा में पानी की गुणवत्ता मानदंडों के अनुसार होनी चाहिए क्योंकि इसका उपयोग न केवल नहाने के लिए वरन् आचमन (प्रार्थना या अनुष्ठान से पहले पानी की घूंट लेना) के लिए भी होता है।

सख्त हुआ एनजीटी

एनजीटी ने एनजीसी के सदस्य सचिव को सुनवाई की अगली तारीख 14 अक्टूबर से पहले की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। एनजीटी ने कहा कि अभी भी करीब 50 प्रतिशत अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट गंगा या उसकी सहायक नदियों में छोड़ा जा रहा है। एनजीटी ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि यह लापरवाही अस्वीकार्य है, इसे शीघ्र सुधारा जाना चाहिए।

पानी में फैल गई थी काई

गौरतलब है कि हाल के वर्षों में गंगा के पानी में कई तरह की अशुद्धियां पाई गई है। कुछ क्षेत्रों में गंगा के पानी में काई भी देखने को मिली है, जिससे गंगा के पानी की गुणवत्ता दिनों दिन गिरती जा रही है। कई शहरों में सीवेज लाइनों व कारखानों से निकलने वाला गंदा पानी गंगा नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे यह स्थिति हो रही है।

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