क्या आप जानते हैं ? जब राजस्थान में सबसे ज्यादा जनसंख्या थी जाटों की, दूसरे नंबर पर थे ब्राह्मण

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जयपुर। एक समय था, जब राजस्थान में सबसे ज्यादा आबादी जाटों की थी। उस समय जनसंख्या के हिसाब से दूसरे नंबर पर ब्राह्मण थे। इसका बाकायदा रिकॉर्डेड प्रमाण है सेंसस 1911 की पुस्तक में। हालांकि उस समय राजस्थान एक अखंड राज्य नहीं होकर छोटी-छोटी रियासतों में बंटा हुआ था।

जयपुर में थे सबसे ज्यादा ब्राह्मण

सन 1911 की जनगणना अनुसार राजस्थान में जाटों की आबादी 9,58,987 थी, जो कुल आबादी का 8.82 प्रतिशत थे। जाटों के बाद दूसरी बड़ी आबादी ब्राह्मणों की 9,25,211 थी, जो कुल आबादी का 8.51 प्रतिशत थे। ब्राह्मणों की बड़ी संख्या जयपुर में थी, जो 3,08,972 थी।

राजस्थान में तीसरी बड़ी आबादी महाजनों की 7,37,708 थी, जो कुल आबादी का 6.8 प्रतिशत थे। चौथे नंबर पर बड़ी आबादी चमार जाति की 7,25,028 थी, जो कुल आबादी का 6.67 प्रतिशत थे। पांचवे नंबर पर बड़ी आबादी राजपूतों की 6,88,091 थी, जो कुल आबादी का 6.33 प्रतिशत थे।

आबादी में छठे पर मीणा व सातवें नंबर पर थे गुर्जर

वर्ष 1911 की जनगणना के अनुसार छठे नंबर पर बड़ी आबादी मीना जाति की 5,56,725 थी, जो कुल आबादी का 5.12 प्रतिशत थे। सातवें नंबर पर बड़ी आबादी गुर्जर जाति की 5,31,114 थी, जो कुल आबादी का 4.89 प्रतिशत थे। आठवें नंबर पर बड़ी आबादी भील जाति की 4,47,335 थी, जो कुल आबादी का 4.17 प्रतिशत थे। नौवे नंबर पर बड़ी आबादी माली जाति की 3,49,670 थी, जो कुल आबादी का 3.22 प्रतिशत थे। दसवें नंबर पर बड़ी आबादी कुम्हार जाति की 3,20,664 थी, जो कुल आबादी का 2.95 प्रतिशत थे।

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