क्या आप जानते हैं ऊंटनी के दूध से नहीं जमता है दही

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जयपुर, 15 फरवरी। ऊंटनी के दूध से दही नहीं जमता है। ऊंटनी के दूध से तब तक दही नहीं बनाया जा सकता जब तक कि इसमें बकरी, भेड़, गाय या भैंस का दूध नहीं मिला दिया जाता। इसका मतलब यह है कि गाय, भैंस या बकरी के दूध में ऐसा कुछ है, जो दूध का दही जमाने के लिए जि़म्मेदार है।
आमतौर पर दूध से दही जमाने के लिए हम जामन का इस्तेमाल करते हैं। जामन में मौजूद बैक्टीरिया, लैक्टोस शर्करा को लैक्टिक अम्ल में बदलते हैं। जामन मिले दूध में ये बैक्टीरिया बढ़ते जाते हैं और दूध की अम्लीयता बढऩे लगती है। अम्लीयता बढऩे से दूध खट्टा होने लगता है। अम्लीयता में यह परिवर्तन कैसीन माइसेल को प्रभावित करता है। इस कारण माइसेल्स को एक-दूसरे से दूर रखने वाला बल समाप्त हो जाता है और ये आपस में जुडऩे लगते हैं। कैसीन माइसेल्स के आपस में जुडक़र ठोस रूप धारण करने को ही दही जमना कहते हैं। गाय और भैंस के दूध की तुलना में ऊंटनी के दूध में कैसीन के माइसेल्स बड़े होते हैं। ऐसे मेें जब बड़े मायसेल्स के समूहीकरण की बारी आती है तो वे आपस में उतनी निकटता से नहीं जुड़ पाते और इसलिए दही ठोस नहीं बन पाता। यही कारण है कि ऊंटनी के दूध से दही पतला बनता है।

प्रोटीन से भरपूर ऊंटनी का दूध

ऊंटनी के दूध में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन होता है। ये दिमाग के सेल्स को विकसित करने में काफी मदद करता है। अगर आप प्रतिदिन एक गिलास ऊंटनी का दूध पीते हैं तो इससे आपकी मेमोरी तेज होती है। ऊंटनी के दूध में विटामिन, खनिज तत्व एवं कैल्शियम प्रचुर मात्र में होता है। ऊंटनी के दूध मेें कैल्शियम भरपूर मात्रा में होने से यह हड्डियों को मजबूत बनाता है।

खट्टा होता है ऊंटनी का दूध

गाय के दूध की तुलना में ऊंट का दूध खट्टा होता है और यह बहुत जल्द खराब नहीं होता है। इसकी आइसक्रीम आसानी से बनाई जा सकती है। ऊंट के दूध से चॉकलेट भी बनाई जाती हैं।

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