महत्वपूर्ण है आहार और विहार

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राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय की चार दिवसीय कार्यशाला संपन्न


जयपुर.
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय में इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर यौगिक साइंसेज बैंगलोर कर्नाटक के सहयोग से योग चिकित्सा पर चार दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न हुई।
कार्यशाला के प्रथम दिन उद्घाटन समारोह का आयोजन पद्मश्री प्रो. वी. प्रकाश अध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी संघ तथा पूर्व निदेशक सीएफटीआरआई मैसूर की उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. नीरज गुप्ता कुलपति प्रभारी ने की। प्रो. गुप्ता ने सम्मानित अतिथि का स्वागत किया और कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति की सराहना की। प्रो. प्रकाश ने योग में अपने अनेक वर्षो के अनुभव को साझा करते हुये सम्बोधन भाषण दिया तथा पथ्य और अपथ्य के सिद्धांतों के साथ ही आहार एवं विहार को सुंदर ढंग से वर्णित किया।
उद्घाटन समारोह के बाद डॉ. अमित सिंह सह आचार्य एस.व्यासा विश्वविद्यालय बेंगलूरू ने मधुमेह प्रबंधन और रोकथाम के लिए योग चिकित्सा की संभावित भूमिका शीर्षक पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।
मधुमेह की आधुनिक समझ पर वार्ता के अतिरिक्त उन्होंने भारत में दुनिया के सबसे बड़े मधुमेह सर्वेक्षण हेतु राष्ट्रीय समन्वयक के रूप में अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने डायबिटिक, प्री.डायबिटिक तथा मधुमेह की जटिलताओं के संबंध में सर्वेक्षण में प्रयुक्त विभिन्न मानदण्डों का वर्णन किया तथा इसके कुछ परिणामों को कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों से साझा किया।
डॉ. काशीनाथ मैत्री सहायक आचार्य योग विभाग राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने मधुमेह प्रबंधन हेतु वैज्ञानिक रूप से वैध लाभदायक अभ्यासों के बारे में जानकारी दी।
कार्यशाला के दूसरे दिन 22 को डॉ. मैत्री ने हाइपरटेंशन तथा हृदयरोगों के लिये योग प्रोटोकॉल के संबंध में जानकारी प्रदान करते हुए प्रात:कालीन सत्र की शुरूआत की। उन्होंने योग के सभी उचित मुद्राओं की प्रक्रिया को बताया तथा अभ्यास के दौरान आवश्यक सावधानियों के साथ प्रत्येक योग मुद्रा के लाभों का वर्णन किया। योगाभ्यास सत्र के बाद सेंटर ऑफ एडवान्स्ड रिसर्च इन कोनशीऔसनेस स्टडीज निमहंस के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राम जयम ने हृदय संबंधी रोगों के प्रबंधन में योग की भूमिका पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।
डॉ. जयम ने डीन ऑरनिश के उदाहरणों को उद्धृत किया और वैज्ञानिक तथा योग सिद्धांतों के साथ प्रत्येक योगासन पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला के तीसरे दिन 23 जून को डॉ. मैत्री ने प्रतिभागियों को पीठ के निचले हिस्से में जटिल दर्द के उपचार के लिए योगाभ्यास करवाया तथा इनके लाभ तथा अभ्यास के दौरान महत्वपूर्ण सावधानियों की जानकारी प्रदान की। योगाभ्यास के सत्र के बाद डॉ. नितिन पाटिल सह आचार्य एवं विभागाध्यक्ष एकीकृत चिकित्सा विभाग एसडीयूएमसी कोलार ने पीठ के निचले हिस्से में जटिल दर्द के प्रबंधन में योग की भूमिका विषय पर व्याख्यान दिया।
कार्यशाला के अंतिम दिन 24 जून को औषधि तथा योग के दृष्टिकोण से कोविड को समझने हेतु कार्यशाला की योजना बनाई गयी थी। डॉ. संजिब पात्रा सहआचार्य योग विभाग राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने प्रदर्शन के माध्यम से योग की प्रक्रिया को दर्शाया। उन्होंने कोविड के समय में भी श्वसन प्रणाली को स्वस्थ रखने की जानकारी पीपीटी के माध्यम से प्रदान की तथा योगाभ्यास करवाया। डॉ. हेमंत भार्गव सहायक आचार्य एकीकृत चिकित्सा विभाग निमहंस ने कोविड और कोविड के बारे में वैज्ञानिक समझ तथा कोविड के दौरान मानसिक स्वास्थ्य की भूमिका विषय पर व्याख्यान दिया।
योग चिकित्सा सत्र के पश्चात समापन समारोह का आयोजन किया गया जिसमें प्रो. अविनाश चन्द्र पांडे निदेशक इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एक्सेलेरेशन एंड यौगिक साइंसेज तथा निदेशक प्रभारी इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर यौगिक साइंसेस मुख्य अतिथि रहे तथा कुलपति प्रभारी प्रो. नीरज गुप्ता ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। प्रो. पांडे ने बेंगलुरु कर्नाटक में आईयूसीवाईएस होने के महत्व को गिनाया और योग के विभिन्न पहलुओं जैसे सत दर्शन वेद और उपनिषद पर अभिभाषण देकर सभी प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया। इस समापन समारोह के साथ ही चार दिवसीय योग चिकित्सा कार्यशाला का समापन हुआ।

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