सभी को उत्तम सुख पहुंचाने वाला धर्म : मुनि संकल्प सागर

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मदनगंज किशनगढ़।

मुनि संकल्प सागर महाराज ने शुक्रवार को सिटी रोड स्थित जैन भवन में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिनेंद्र भगवान ने अपनी देशना में कहा हैं कि जो धर्म करता है उसे ही सुख मिलता है क्योंकि धर्म सबको उत्तम सुख पहुंचाने वाला है धर्म के मूल तत्व सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन, सम्यक चारित्र हैं। जो कि संसार से पार लगाने वाले हैं। वही मिथ्यादर्शन, मिथ्याज्ञान और मिथ्याचरित्र संसार के सागर में भटकने वाले हैं। मुनि श्री ने बताया कि सदैव तौलकर बोलना सीखो क्योंकि तीन चीज लौटकर वापस कभी नहीं आती। छोड़ा हुआ तीर, निकले हुए प्राण और बोले हुए वचन अर्थात तीर कमान से, बात जबान से और शरीर प्राण से निकल जाने के बाद वापस नहीं आते महाराज जी ने बताया कि भगवान महावीर का संदेश है जियो और जीने दो है। धर्म जीने और मरने दोनों की कला सिखाता है।

मुनिराज जमीन पर देख कर चलते हैं ताकि किसी छोटे से छोटा प्राणी, चींटी आदि सूक्ष्मजीवों की भी हिंसा न हो.. मनुष्य के जीवन में नहीं बल्कि सभी के जीवन में संगति का बहुत प्रभाव पड़ता है जैसे नदी का जल जब तक नदी में बहता है तब तक मीठा है पीने योग्य है। लेकिन जैसे ही वह आगे जाकर समुद्र में मिल जाता है तो उसकी संगति खराब हो जाती है और वह जल पीने योग्य नहीं रहता इसलिए धर्म की संगति से, साधुओं की संगति से, सज्जन पुरुषों की संगति से सुख मिलता है। वही खोटी संगति के लोगों से, व्यसनों से प्रवृति से चारों गतियां में दुख भोगना पड़ता है। मुनि श्री ने कहा कि धर्म एक सुगंधित फूल है और जो ना समझो तो यह उसकी भूल है। सायंकालीन णमोकार चालीसा, स्वरूप संबोधन कक्षा, आरती की गई।

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