निजीकरण रोकने और पुरानी पेंशन की मांग

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विद्युत निगमों के कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

जयपुर। विद्युत निगमों में अलग-अलग नामों से हो रहे निजीकरण को रोकने और पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग को लेकर विद्युत कंपनियों के कर्मचारी एकजुट हो गए हैं और मांग नहीं मानने पर कर्मचारियों ने दीपावली से पहले प्रदेश सरकार को एक बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी है। इस संबंध में कर्मचारियों ने सोमवार को जिला कलेक्टर प्रथम दिनेश कुमार शर्मा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा।
अलग-अलग विद्युत निगम से जुड़े कर्मचारी सोमवार को जयपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे और यहां निजीकरण के विरोध और पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी भी की। कर्मचारियों ने इस बात पर आक्रोश जताया कि निगम में निरंतर अलग-अलग नामों से निजीकरण किया जा रहा है जो कि निगम हित में नहीं है, इससे आम उपभोक्ताओं को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली, चिकित्सा, शिक्षा पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है परन्तु सरकार निगमों की निजी हाथों में देकर आम जनता के साथ धोखा कर रही है।
कर्मचारी नेताओं ने बताया कि जब विद्युत मंडल का 2000 में विघटन किया गया तब विद्युत मंडल का घाटा कम था परन्तु जब निगमों को पांच भागों में बांटा गया है उसका लाभ नहीं हुआ बल्कि घाटा निरंतर बढ़ता जा रहा है। निगम प्रशासन की ओर से लाभांश वाले शहरों को निरंतर निजी हाथों में देकर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। इसलिए बिजली निगमों को निजी हाथों में देने के विषय पर विचार करना अतिआवश्यक है।
राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ के प्रवक्ता यतेंद्र कुमार ने बताया कि जब पूरा प्रदेश कोरोना काल में संघर्ष कर रहा था उस समय बिजली के प्रत्येक कर्मचारी ने अपनी जान जोखिम में डालकर भी सरकार के कंधे से कंधा मिलाकर आर्थिक व शारीरिक रूप से पूर्ण सहयोग किया। पूरे प्रदेश में बेरोजगार बैठे विद्युत से संबंधित शिक्षित युवाओं को भर्ती कर रोजगार देना सरकार की जिम्मेदारी है एवं नियमानुसार स्थाई प्रकृति का कार्य स्थाई कर्मचारियों से ही कराया जाना चाहिए। सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है अतः निगम को घाटे से बचाने व निगम के बेशकीमती संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए निगम को निजी हाथों में बेचना तर्कसंगत नहीं है।

राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ के प्रवक्ता यतेंद्र कुमार ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से 2004 के बाद के सभी राज्य कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम की घोषणा की गई है परन्तु विद्युत विभाग के पांचो निगमों में कार्यरत कर्मचारियों को इस सुविधा का लाभ नहीं दिया जा रहा है। इस संबंध में विद्युत निगम प्रशासन की ओर से लगातार राज्य सरकार को अवगत करवाया जा रहा है, परन्तु सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। इससे कर्मचारियों में आक्रोश है।

राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ के नेताओं का कहना है कि विद्युत निगम प्रशासन ने समन्वय समिति के स्तर पर निर्णय लेकर 01.01.2004 के बाद नियुक्त कार्मिकों के लिए एनपीएस लागू की गई थी। इसके बाद में समन्वय समिति में ही निर्णय लेकर इसे सीपीएफ स्कीम में बदल दिया गया।
विद्युत कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई कि पुरानी पेंशन योजना (OPS) सभी विभागों में लागू की गई है उसे बिजली विभाग के पांचों निगमों में भी लागू कर बिजली कर्मचारियों को राहत दी जाए।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार निजीकरण नही रोकती है और विद्युत कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू नहीं करती है तो
राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ के नेतृत्व में दीपावली पर उग्र आन्दोलन करेगा, जिसकी जिम्मेदारी विद्युत निगम प्रशासन एवं राज्य सरकार की होंगी। इस दौरान संयुक्त महामंत्री सुशील सेन अखिल भारतीय महासंघ के सदस्य योगेश सक्सेना, जयपुर डिस्कॉम के अध्यक्ष गोविंद पालीवाल, जयपुर शहर महामंत्री विष्णु शर्मा, जयपुर ग्रामीण अध्यक्ष हेम चंद सैनी उपमहामंत्री रणजीत सिंह, कुलदीप सिंह अभिनव शर्मा, अजय, किशोर सिंह आदि मौजूद रहे।

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