दीनदयाल विचार मंच सदस्यों ने किया पौधरोपण

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चैनपुरिया स्थित माधव विद्यापीठ में आयोजन


मदनगंज-किशनगढ़.
पंडित दीनदयाल उपाध्याय विचार संघ राजस्थान दिनांक 12 अगस्त को चैनपुरिया स्थित माधव विद्यापीठ परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत विभिन्न प्रकार के उपयोगी पौधे लगाये गए। इस अवसर पर संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम सहाय प्रजापति, जिला अध्यक्ष डॉ. अनिल पालीवाल, गजानन्द, दिनेश, महेंद्र नैय्यर आदि पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पिछले पांच साल में 1.29 करो? मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना
नई दिल्ली.
देश में पिछले पांच साल में आम चुनाव और राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान करीब 1.29 करोड़ मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। गैर.सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोके्रटिक रिफाम्र्स (एडीआर) ने यह जानकारी दी।
एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच (एनईडब्ल्यू) ने 2018 से 2022 के दौरान विभिन्न चुनावों में नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) विकल्प के तहत डाले गए वोटों की संख्या का विश्लेषण किया। रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में राज्य विधानसभा चुनावों में नोटा के तहत औसतन 6453652 वोट डाले गए। वहींए लोकसभा चुनावों में बिहार की गोपालगंज सीट पर सबसे अधिक 51660 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना जबकि लक्षद्बीप लोकसभा सीट पर सबसे कम 100 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया।
रिपोर्ट के मुताबिक विधानसभा चुनावों के दौरान 2020 में दो राज्यों में सर्वाधिक 1.46 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुनाए जिसमें बिहार विधानसभा चुनाव में 706252 जबकि दिल्ली में 43108 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया।
इसके मुताबिक 2022 में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में सबसे कम लोगों ने नोटा का विकल्प चुना। इनमें 0.70 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुनाए जिसमें गोवा में 10629 मणिपुर में 10349 पंजाब में 110308 उत्तर प्रदेश में 637304 और उत्तराखंड में 46840 मतदाताओं ने ईवीएम में नोटा का बटन दबाया।
रिपोर्ट के मुताबिकए 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान सबसे अधिक 742134 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। वहीं 2018 के मिजोरम विधानसभा चुनाव के दौरान नोटा के तहत सबसे कम 2917 वोट डाले गए। इसके मुताबिक 2018 में छत्तीसगढ़ राज्य विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना जोकि 1.98 फीसदी रहा। वहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 और मिजोरम विधानसभा चुनाव 2018 में नोटा के तहत सबसे कम प्रतिशत यानी 0.46 प्रतिशत मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। एडीआर के मुताबिक 2018 से लेकर अब तक विधानसभा चुनावों के दौरान ऐसी सीटों पर 2677616 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना जहां चुनाव लड रहे तीन या इससे अधिक उम्मदीवारों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे थे।

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