कर्ज और बेरोजगारी ने ले ली 26 हजार लोगों की जान

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केन्द्र सरकार ने संसद पेश किए आंकड़े

नई दिल्ली, 9 फरवरी। देश में बेरोजगारी हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहा है। कोरोना महामारी के प्रकोप के साथ ही देश में बेरोजगारी और बढ़ी है। बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर विपक्ष भी केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधता रहा है। रोजगार नहीं मिलने की चलते लोग आर्थिक तंगी का शिकार होते हैं, जिससे घर परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कई लोग अपनी जान भी दे देते हैं।
इसी बीच केन्द्र की मोदी सरकार ने बुधवार यानी 9 फरवरी को संसद में बेरोजगारी की वजह से जान देने वाले लोगों का एक आंकड़ा पेश किया है। सरकार ने राज्यसभा में बताया है कि 3 साल में बेरोजगारी की वजह से 10 हजार लोगों ने अपनी जान दे दी।
इसके अलावा सरकार ने बताया कि 2018 से 2020 के बीच 16,000 से अधिक लोगों ने कर्ज के कारण या दिवालिया होने के कारण आत्महत्या की, जबकि 9140 लोगों ने बेरोजगारी के चलते अपनी जान दे दी। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि कर्ज या दिवालियेपन के कारण 2020 में 5,213 लोगों ने, 2019 में 5,908 और 2018 में 4,970 लोगों ने अपनी जान दे दी।

एक लिखित सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि 2020 में बेरोजगारी के कारण कुल 3,548 लोगों ने, 2019 में 2,851 और 2018 में 2,741 लोगों ने सुसाइड कर लिया।

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