यहां बनेगा देश का सबसे बड़ा तैरने वाला सोलर पावर प्रोजेक्ट

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हरित ऊर्जा के विकास में बड़ा कदम

जयपुर.

पूरी दुनिया पर्यावरण संबंधित समस्याओं से लगातार जूझ रही है। दरअसल अधिक मात्रा में हो रहे कार्बन उत्सर्जन के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है जिससे तमाम तरह की समस्याएं आ रही हैं। जीरो कार्बन उत्सर्जन सुनिश्चित करने और पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण पहल करते हुए केंद्र सरकार सोलर पावर के विकास और विस्तार पर खास ध्यान दे रही है। आज देश में सोलर पावर के विस्तार और लोगों के बीच पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कई तरह की योजनाएं चल रही हैं। इसी कड़ी में भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट रामागुंडम तेलंगाना में पूरी तरह से व्यावसायिक उपयोग के लिए शुरू हो गया है ।
दरअसल फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट किसी भी जमीन पर जो सोलर प्लांट लगाए जाते हैं उनसे काफी अलग होता है। ये सोलर प्लांट्स के लिए एक ऐसा विकल्प होता है जिसमें वॉटर बॉडीज की सतह पर फोटोवोल्टिक पैनलों की तैनाती की जाती है। इन फ्लोटिंग सोलर प्लांट्स को स्थापित करने का एक अन्य लाभ वॉटर बॉडीज का कूलिंग प्रभाव हैए इससे इन सौर पैनलों का प्रदर्शन 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बढ़ते प्रयास से आज रामागुंडम तेलंगाना में 100 मेगावाट की क्षमता के साथ भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट व्यावसायिक उपयोग के लिए शुरू हो गया है। रामागुंडम में 100 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट उन्नत तकनीक के साथ.साथ पर्यावरण के अनुकूल है। परियोजना 40 सेगमेंट्स में विभाजित हैं और इनमें से प्रत्येक की क्षमता 2.5 मेगावाट है। यह परियोजना 423 करोड़ रुपए की लागत से तैयार है जो जलाशय के 500 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है।
पर्यावरण के संरक्षण की दृष्टि से यह फ्लोटिंग सोलर प्लांट अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। वॉटर बॉडीज से जुड़ा होने के कारण इस प्रोजेक्ट में न्यूनतम भूमि की आवश्यकता होती है। इसके अलावा तैरते हुए सौर पैनलों की उपस्थिति के साथ जल निकायों से वाष्पीकरण की दर कम हो जाती है और इस प्रकार जल संरक्षण में मदद मिलती है। इस तरह के प्लांट की मदद से प्रति वर्ष लगभग 32.5 लाख क्यूबिक मीटर पानी के वाष्पीकरण से बचा जा सकता है। इस मॉड्यूल से प्रति वर्ष 1 लाख 65 हजार टन कोयले की खपत से बचा जा सकता है और प्रति वर्ष 2 लाख 10 हजापर टन के कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बचा जा सकता है। पर्यावरण संरक्षण और कम लागत को देखते हुए सरकार भी इसे बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार कई सौर ऊर्जा पहलों के माध्यम से इसे आगे बढ़ा रही है।
भारत सरकार ने 2022 के अंत तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है। सौर ऊर्जा भारत के जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना में शामिल है जिसमें नेशनल सोलर मिशन का अहम योगदान है। इसका उद्देश्य फॉसिल आधारित ऊर्जा विकल्पों के साथ सौर ऊर्जा को प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य सहित बिजली उत्पादन एवं अन्य उपयोगों के लिए सौर ऊर्जा के विकास एवं उपयोग को बढ़ावा देना है। नेशनल सोलर मिशन के माध्यम से सौर ऊर्जा के लिए उपयुक्त अवयवों और उत्पादों के घरेलू उत्पादन के माध्यम से देश में सौर ऊर्जा उत्पादन की लागत को कम करना है। सौर ऊर्जा उत्पादन की लागत को कम करने और पूरे विश्व की ऊर्जा समस्यां को एक सामूहिक विकल्प देने के लिए पीएम मोदी ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस बनाने की एक बड़ी पहल की।
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की घोषणा पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति द्वारा वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के 21वें सत्र में फ्रांस के पेरिस में की गई थी। यह एक अंतर सरकारी संगठन है जिसका प्राथमिक कार्य सौर प्रौद्योगिकी की लागत को कम करके दुनियाभर में सौर विकास को पहुंचाना है। इसके साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर देशों की मदद करते हुए एक आत्मनिर्भर ऊर्जा विकल्प स्थापित करने में मदद करता है।

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