देश की पहली हाईटेक निगरानी प्रणाली रणथंभौर में

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हाइटेक प्रणाली से रणथम्भौर टाइगर रिजर्व पार्क के
वन्यजीवों की निगरानी, वन्य जीव की सुरक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकता

जयपुर. राजस्थान वन्यजीव पर्यटन के रूप में तेजी से विश्वपटल पर अपनी पहचान बना रहा है। हर साल देश और दुनिया से हजारों पर्यटक यहां के वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के लिए राजस्थान आते हैं। राजस्थान सरकार द्वारा वन्यजीवों के संरक्षण एवं उन्हें शिकार और जंगल में लगने वाली आग से बचाने, वन्यजीवों की निगरानी और अवैध शिकार विरोधी प्रणाली (WILD LIFE SURVEILLANCE & ANTI POACHING SYSTEM PROJECT) विकसित की गई है। रणथम्भौर टाइगर रिजर्व पार्क सवाई माधोपुर, सरिस्का टाइगर रिजर्व अलवर, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व कोटा, जवाई बांध लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व पाली और झालाना लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व जयपुर के जंगलों के संरक्षित क्षेत्रों के लिए हाईब्रिड मॉडल पर आधारित हाई एंड थर्मल व ऑप्टिकल कैमरे, पॉईंट-टू-पॉईंट वॉयरलैस नेटवर्क और संचार उपकरण, सौर उर्जा प्रणाली और ड्रोन आदि से लैस एक एकीकृत निगरानी तंत्र विकसित किया गया है।

देश की पहली हाइटेक निगरानी प्रणाली

सवाई माधोपुर के रणथम्भौर टाइगर रिजर्व पार्क में बाघों के अवैध शिकार और वन्यजीव विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग ने उन्नत शिकार विरोधी निगरानी तंत्र विकसित किया है, जिसमें थर्मल व ऑप्टिकल, पीटीजेड, बुलेट , डॉम कैमरे और ड्रॉन स्थापित किये गये हैं। यह देश के किसी भी राज्य द्वारा स्थापित पहली 24 घण्टे हाईटेक निगरानी और अवैध शिकार प्रणाली है। इसका कन्ट्रोल कमाण्ड सेन्टर रामसिंहपुरा, सवाई माधोपुर के शिल्पग्राम में स्थापित किया गया है। यहां बाघो का अवैध शिकार और वन्यजीव गतिविधियों का लाईव फीड देखकर उनकी फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है तथा जिसका इन्सीडेन्ट क्रिएट करके वन विभाग के अधिकारियों को ई-मेल एवं मैसेज के माध्यम से सूचित किया जाता है। इस पर वन विभाग द्वारा तुरन्त कार्यवाही की जाती है। निगरानी तंत्र द्वारा वन विभाग को वन्यजीव प्रजातियों के संचालन पटल का विश्लेषण करने के लिए विभिन्न प्रकार की रिपोर्ट भी प्रदान की जाती हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग सवाई माधोपुर के सयुंक्त निदेशक पंकज मीना बताया है कि सवाई माधोपुर के रणथम्भौर में 13 स्थानों पर टॉवर लगाए गए हैं। जिनमें से एक मुख्य टॉवर 45 मीटर ऊंचा कन्टेनर के पास है जो फीड देने के काम आता है व अन्य 12 साईट्स शेरपुर, झूमर, राजबाग-1, राजबाग-2, मानसरोवर बांध, बालाजी टेन्ट, आमाघाटी, हिलटॉप, हाईपॉइन्ट, जागीरदार की हवेली, भैरव जी का स्थान एवं लाड़ा-लाड़ी की घाटी पर थर्मल ऑप्टीकल, पीटीजेड, डॉम, बुलेट-1 एवं बुलेट-2 प्रकार के कैमरे लगाए गए हैं।

शिकार विरोधी तंत्र के उद्देश्य

इसके उद्देश्य 24 घण्टे ऑनलाइन निगरानी और अवैध शिकार विरोधी प्रणाली की स्थापना, बाघ या अन्य पहचाने गए वन्यजीव प्रजातियों की स्वचालित निगरानी किसी वन्यजीव अपराध, पशु की प्रतिक्रिया, बचाव की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार, वन्यजीव व वन अपराध के खिलाफ रोकथाम, प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना, परिचालन संचालन स्तर की दक्षता एवं प्रभावी निर्णय लेने के लिए सिस्टम संचालित विश्लेषणात्मक रिपोर्ट तैयार करना है।

प्रणाली की विशेषताएं

बाघ, तेंदुआ, अन्य रिजर्व का लाइव फीड, भू मानचित्रों पर आलेखीय चेतावनी, रिमोट कन्ट्रोल करने योग्य कैमरा ऑपरेशन, पॉईंट-टू-पॉईंट सुरक्षित वायरलेस कनेक्टिविटी, कन्ट्रोल रूम से निगरानी एवं रिकॉर्डिंग का प्रावधान, संवेदनशील बिन्दुओं की तत्काल निगरानी एवं अरण्य भवन में कमांड एण्ड कन्ट्रोल सेन्टर की स्थापना इसकी विशेषताएं हैं।

प्रोजेक्ट स्टेक हॉल्डर्स

वन विभाग राजस्थान सरकार उपयोगकर्ता विभाग, राजकॉम्प इंफो सर्विस लिमिटेड क्रियान्वयन एजेन्सी, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग राजस्थान सरकार-प्रोजेक्ट ऑनर। इस प्रोजेक्ट स्टेक हॉल्डर्स हैं।

प्रोजेक्ट से लाभ

इस प्रोजेक्ट के लगने से अरण्य क्षेत्रों में कैमरों से 24 घण्टे निगरानी सम्भव हुई है। जिससे बाघ या अन्य पहचान किए गए वन्यजीव प्रजातियों की गतिविधियों की निगरानी सम्भव हुई है। वन्यजीवों के प्रति अपराध रूका है, पशुओं की प्रतिक्रिया तथा बचाव की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वहीं जंगलों में लगने वाली आग का शीघ्र पता चलने से उसे तत्काल बुझाना सम्भव हुआ है।

मुम्बई, महारष्ट्र में प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग भारत सरकार द्वारा 8 फरवरी 2020 को ई-गर्वेनेन्स पर आयोजित 23वें राष्ट्रीय सम्मेलन में परियोजना को उभरती प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमता, मशीन लर्निंग, यूएवी प्रौद्योगिकी एवं डेटा एनालिटिक्स को अपनाने के लिए उत्कृष्टता पुरस्कार के अन्तर्गत रजत पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।


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