Chyawanprash क्या आप जानते हैं च्यवनप्राश कब खाएं और कितना खाएं

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जयपुर, 19 जनवरी। हमारे यहां सर्दियों में च्यवनप्राश खाने का प्रचलन काफी समय से है। ऐसा कहा जाता है कि प्राचीन काल में च्यवनप्राश ऋषि मुनि व राजा महाराजा भी उपयोग करते थे। यह एक इम्यूनिटी बूस्टर है, जिसे प्राचीन काल से उपयोग किया जाता रहा है। स्वास्थ्य के लिए यह किसी रामबाण से कम नहीं है। खासतौर से सर्दियों में।

च्यवनप्राश एक प्राचीन आयुर्वेदिक उपचार है, जो इम्यूनिटी बढ़ाकर बीमारियों से ग्रसित होने के जोखिम को कम करता है। इसका आप दिन में सेवन कर सकते हैं। इसे संक्रमणों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। बाजार में च्यवनप्राश की कई वैराइटी उपलब्ध हैं। आप च्यवनप्राश नहीं खाते हैं तो दवा के रूप में ही सही, इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इसका सेवन शुरू कर देना चाहिए।

विटामिन सी से भरपूर

च्यवनप्राश कई तरह की जड़ी-बूटियों और मसालों से तैयार एक पेस्ट जैसा गाढ़ा मिश्रण है। इसमें मुख्य रूप से विटामिन सी से भरपूर आंवंला होता है। साथ ही इसमें कई औषणीय गुणों से भरपूर जड़ी-बूटियां और मसाले मिलाए जाते हैं। ये प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने और रोग पैदा करने वाले कारकों से लडऩे की शरीर की क्षमता को बढ़ाता है।

च्यवनप्राश खाने के फायदे

ज्यादातर भारतीय घरों में च्यवनप्राश का सेवन सर्दियों में किया जाता है। इस मौसम में बीमार होने की संभावना ज्यादा रहती है। आप चाहें तो सालभर इसका सेवन कर सकते हैं। प्रतिरक्षा को बढ़ाने के अलावा च्यवनप्राश खाने से श्वसन तंत्र को शुद्ध करने में मदद मिलती है। यह न केवल बलगम बनने की प्रक्रिया को बाधित करता है बल्कि श्वसन मार्ग की सफाई करने के लिए भी जाना जाता है।
च्यवनप्राश गैसों के स्वस्थ संचलन को बढ़ावा देता है। यह प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के साथ यौन समस्याओं के निराकरण में भी सहायक है। यह पुरूष और महिलाओं में प्रजनन क्षमता बढ़ाने का बेहतरीन घरेलू उपचार है।

यह है च्यवनप्राश खाने का सही तरीका

च्यवनप्राश का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, लेकिन इसका बहुत ज्यादा मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए। च्यवनप्राश के ज्यादा सेवन से अपच, पेट फूलना, पेट में सूजन, दस्त और पेट में गड़बड़ हो सकती है। वयस्क रोजाना 1-1 चम्मच च्यवनप्राश सुबह शाम गुनगुने दूध या पानी के साथ सेवन कर सकते हैं। बच्चों को रोजाना आधा चम्मच से ज्यादा च्यवनप्राश नहीं खिलाना चाहिए। अस्थमा या सांस की बीमारी से पीडि़त लोगों को दूध या दही के साथ च्यवनप्राश का सेवन नहीं करना चाहिए।

डायबिटीज के रोगी बरतें सावधानी

च्यवनप्राश को खट्टा मीठा बनाने के लिए इसमें चीनी, गुड़ या शहद का उपयोग किया जाता है। इसलिए जिन लोगों का ब्लड शुगर हाई रहता है, उन्हें इसका सेवन करने में सावधानी बरतनी चाहिए। ब्लड शुगर कंट्रोल है, तो व्यक्ति रोजाना लगभग 3 से चार ग्राम ग्राम च्यवनप्राश खा सकता है। डायबिटीज के रोगी को च्यवनप्राश के सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य ले लेनी चाहिए।

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