राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर समारोह आयोजित

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जयपुर. “जिस क्षेत्र में आगे जाना चाहते है उसके लिए मन लगाके पढ़ाई करें पर भारत माँ के सम्मान में एकजुट होकर लड़ना भी होगा, एक दूसरे का साथ देना होगा तभी हम भारत माँ का नाम ऊंचा कर पाएंगे,” यह कहना था माननीय राज्य मंत्री, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राजस्थान सरकार श्री संजय शर्मा जी का जो राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सभा को संबोधित कर रहे थे।

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमे उद्घाटन समारोह के साथ “अश्वगंधा पर विशेष ज़ोर देने के साथ औषधीय पौधों के अनुसंधान में हालिया प्रगति” शीर्षक से औषधीय पौधों पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का भी शुभारंभ हुआ। साथ ही राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर विज्ञान प्रदर्शनी” और “मॉडल निर्माण प्रतियोगिता और प्रदर्शनी” के साथ कई अनूठी गतिविधियों का भी आयोजन हुआ।

संजय शर्मा ने अपने अभिभाषण में विज्ञान का मानव जीवन पर महत्व पर बोलते हुए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेत्रत्व में हुई भारत की कई सारी उपलब्धियों जैसे विश्वकर्मा योजना, स्वदेशी वैक्सीन का निर्माण, किसानों द्वारा कीटनाशक दवाइयों के कम उपयोग पर खोज, चंद्रयान जैसा कीर्तिमान आदि पर चर्चा करते हुए कहा कि देश की तरक्की में बहुत बड़ा योगदान वैज्ञानिकों का है और इसके लिए मैं उनको धन्यवाद देता हूँ।

संजय शर्मा ने अपनी ज़िंदगी के कई रोचक प्रसंग भी सभी से साझा किए और बताया कि कैसे उन्होंने एक आम इंसान से देश के लोकतंत्र तक पहुँचने का सफर तय किया। उन्होंने आगे बताया कि देश के लोकतंत्र की यह खूबी है कि मेरे जैसा आम स्टूडेंट आज इस पद तक पहुँच पाया। शर्मा ने भारत के पौराणिक रूप संयुक्त परिवार पर भी जोर दिया।

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आनंद भालेराव ने इस विशेष अवसर पर स्वतंत्रता पूर्व के महान वैज्ञानिकों के बारे में सभी से साझा किया। प्रो भालेराव ने बताया कि कैसे स्वतंत्रता पूर्व अंग्रेज भारतीय वैज्ञानिकों से बुरा व्यवहार करते थे और किस तरह भारतीय वैज्ञानिकों ने उस दौर में अपना अमूल्य योगदान दिया और देश का स्वाभिमान स्थापित किया। उन्होंने कई ऐसे वैज्ञानिकों के बारे में चर्चा की जिनके बारे में शायद बहुत लोग नहीं जानते जैसे डॉ राजेश कोचर, डॉ जगदीश चंद्र बसु, डॉ प्रफुल चंद्र राय, डॉ एस चंद्रशेखर आदि।

प्रो भालेराव ने आगे कहा कि भारत हर क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति कर रहा है और हमें याद रखना चाहिए कि इसकी नींव रखने वाले कई वैज्ञानिक हैं। प्रो भालेराव ने अपने अभिभाषण में स्वामी विवेकानंद, जमशेदजी टाटा और सर सी वी रमन से जुड़े कई रोचक प्रसंग साझा किए। कार्यक्रम में शामिल अतिथियों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि माननीय मंत्री जी हर रोज एक पेड़ लगते है और एक प्रतिबद्ध व्यक्ति के रूप में उनकी प्रशंसा की।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एस के सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सिर्फ अनुसंधान ही महत्वपूर्ण नहीं बल्कि इनोवैशन भी जरूरी है। प्रो सिंह ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि विकास के कारण हमने पर्यावरण को बिगाड़ दिया है और इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने प्राकृतिक संसाधनों को अक्षुण्ण रखें। उन्होंने कहा कि हमें सतत विकास पर जोर देना चाहिए। प्रो सिंह ने विश्वविद्यालय में हुई प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति की प्रशंसा की और कहा कि राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में से एक है।

नैशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड, आयुष मंत्रालय भारत सरकार के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रो महेश कुमार दाधीच ने कहा कि विज्ञान और आध्यात्म में ज्यादा अंतर नहीं है और दोनों ही सत्य के प्रतीक है। प्रो दाधीच ने अश्वगंधा जैसे औषधीय पौधे की खूबियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि विज्ञान के माध्यम से ये प्रकाशित हो चुका है कि अश्वगंधा तनाव और अवसाद को दूर करने में मदद करता है, स्मृति शक्ति को बढ़ाता है, नींद अच्छी आती है, फेफड़ों में आक्सिजन को बढ़ाकर ऐथलेटिक क्षमता में सुधार करता है। उन्होंने इस बात का अनुरोध किया कि हर किसी को अश्वगंधा का पौधा अपने घर में लगाना चाहिए ताकि इसके फायदे घर घर तक पहुंचे।

प्रोफेसर डीएन मोकट, प्रधान अन्वेषक और क्षेत्रीय निदेशक, क्षेत्रीय सह सुविधा केंद्र पश्चिमी क्षेत्र, एसपीपीयू ने भी विशेष अतिथि के रूप में अपनी बात रखी और औषधीय पौधों के बारे में विस्तार से चर्चा की।

सम्मानित अतिथि एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़ के निदेशक प्रो डॉ भोला राम गुर्जर ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में संकीर्ण मानसिकता को बदलने की आवश्यकता है क्योंकि जो साथ चलते है वही उत्कृष्टता के ओर बढ़ पाते है। प्रो गुर्जर ने गुणवत्ता पर चर्चा करते हुए कहा कि नैतिक मूल्यों अगर मजबूत नहीं है तो हम कितने भी विद्वान हो जाए फायदेमंद नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि प्रभावी अनुसंधान करने से ही विकसित भारत का सपना पूरा होगा और तभी हम आत्मनिर्भर होंगे। प्रो गुर्जर ने “वन कन्ट्री वन जर्नल” का भी सुझाव दिया।

इस अवसर पर एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़ के साथ एक करार पर भी हस्ताक्षर किए गए जिसे शिक्षकों की तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता को समृद्ध करने की दृष्टि से किया गया है साथ ही संयुक्त रूप से प्रस्तावित क्रेडिट आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम, संयुक्त अनुसंधान, संयुक्त सम्मेलन, अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आदि पर कार्य किया जाएगा। साथ ही राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर प्रकाशित एक स्मारिका का विमोचन भी सम्मानित अतिथियों द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में स्कूल ऑफ लाइफ साइंस के डीन प्रोफेसर सी.सी. मण्डल ने स्वागत भाषण दिया जिसके पश्चात विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने कुलगीत व स्वागत गीत प्रस्तुत किया और अंत में धन्यवाद ज्ञापन राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव प्रो विपिन कुमार ने किया।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की प्रतिभा को उजागर करने के लिए शोध अनुदान लेखन, तीव्र शोध प्रस्तुति, पैनल चर्चा, शोध छात्रों द्वारा साइंस ग्रांट शोडाउन, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आदि सहित कई गतिविधियों आयोजित की गई है। इस अवसर पर प्राचीन और आधुनिक भारत में विज्ञान के विकास में योगदान देने वाले भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान पर एक “विज्ञान प्रदर्शनी” भी आयोजित की गई है। साथ ही एक विशेष “मॉडल निर्माण प्रतियोगिता और प्रदर्शनी” भी लगाई गई है जिसमे अजमेर, किशनगढ़ और आसपास के गांवों के स्कूलों के विद्यार्थियों भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे है।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम 1 मार्च तक चलेंगे।

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