Breastfeeding: स्तनपान को लेकर पहली बार मां बनने वाली महिलाएं जान लें ये सच

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नई दिल्ली। पहली बार मां बनना एक सुखद एहसास तो होता है, लेकिन कुछ भ्रांतियों के कारण उसके साथ कई परेशानियां भी आती हैं। ऐसे ही एक समस्या है स्तनपान को लेकर। जब भी नवजात शिशु रोता है तो परिवार की अन्य महिलाओं को यही लगता है कि बच्चा भूखा है, चाहे उसका जो कारण हो। ऐसे में फिर उभरकर आता है एक नया सवाल कि बच्चे की मां के स्तनों में पर्याप्त दूध नहीं है और बच्चा भूखा रहता है। इसी के साथ पहली बार मां बनने वाली महिलाओं के लिए एक असहनीय पीड़ा की शुरुआत हो जाती है। बहुत सी महिलाएं हैं, जो इसी तरह की परिस्थितियों का शिकार होती हैं जबकि सच्चाई इससे परे होती है। इसी को लेकर हम महिला की पीड़ा और उसकी सच्चाई को सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं, इस लेख के माध्यम से –

खुद अपराध बोध से ग्रसित

प्रियंका (बदला हुआ नाम) के लिए मां बनना जहां सुखद अहसास था, वहीं यह कम चुनौतीपूर्ण भी नहीं था, खासकर तब जब उसे अपने नवजात को दूध पिलाना होता था। उसे लगता था कि वह अपने बच्चे को पर्याप्त स्तनपान नहीं करा पा रही है और नवजात हर दो घंटे में स्तनपान के बावजूद बिलखता रहता था। पहली बार मां बनने पर उसे जो खुशियां मिली थी, उसे जल्द ही अपराध बोध और बेबसी की भावनाओं ने घेर लिया। आसपास का हर व्यक्ति यह कहता था कि उसेअपने बच्चे को बाहरी दूध पिलाना शुरू करना चाहिए।

ससुराल के तानों ने दिया तनाव

तीस-वर्षीया प्रियंका ने कहा यह मेरे लिए बहुत मुश्किल स्थिति थी। मैं बहुत तनाव में थी और मेरे ससुराल वालों के तानों ने हालात और बदतर कर दिए, जो ऐसे मजाक करते थे कि एक दुधारू गाय तुमसे ज्यादा बेहतर होती।’ हालांकि ये चीजें मजाकिया लहजे में कही जाती थी, लेकिन इन बातों का मुझ पर इतना ज्यादा असर पड़ा कि मैं अपने बेटे को पर्याप्त स्तनपान नहीं करा पा रही थी और उसे बाद में गाय का दूध पिलाना पड़ा।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय संयुक्त परिवार में हर दूसरी मां ऐसी भ्रांतियों का शिकार बनती हैं, जहां बच्चे के जन्म को लेकर खुशी में मां को नजरअंदाज कर दिया जाता है। विशेषज्ञों ने इस पर जोर दिया कि नयी माताओं के लिए परिवार का सहयोग बहुत जरूरी है, क्योंकि वे बहुत ज्यादा मनोवैज्ञानिक और शारीरिक तनाव से गुजरती हैं।

बच्चे के लिए होता है पर्याप्त दूध

दिल्ली के एक निजी अस्पताल में स्तनपान विज्ञान की परामर्शक डॉ. साक्षी भारद्वाज ने कहा कि मैं यहां या अस्पताल के बाहर हर दूसरी मां को इस धारणा को लेकर परेशान देखती हूं कि वह अपने बच्चे को पर्याप्त स्तनपान नहीं करा पा रही हैं। नई माताओं के लिए यह समझना मुश्किल है कि उन्हें क्या करना चाहिए। ऐसा होता ही नहीं है कि कोई मां अपने बच्चे के लिए पर्याप्त दूध उत्पन्न नहीं कर सकती।

तनाव के कारण घटता है दूध

चिकित्सकों का कहना है कि स्तनपान में तनाव एक बहुत महत्वपूर्ण कारक होता है। सी-सेक्शन के बाद दर्द और कई रातों तक नींद न आने की वजह से दूध की आपूर्ति पर असर पड़ता है। फोर्टिस हॉस्पिटल में प्रसूति एवं स्त्री रोग की वरिष्ठ परामर्शक डॉ. उमा वैद्यनाथन ने कहा कि मैं उन्हें अपने मानसिक स्वास्थ्य एवं बच्चे की भलाई को प्राथमिकता देने और दूसरों की बातों पर ज्यादा ध्यान न देने की सलाह देती हूं। मैं उन्हें बताती हूं कि स्तनपान न करा पाना बहुत दुर्लभ होता है और इसका संबंध तनाव से होता है।’’

भूख के लिए इन हाव-भावों पर दे ध्यान

चार साल के बच्चे की मां डॉ. साक्षी भारद्वाज ने कहा, हम मां बनने वाली महिलाओं और उनके रिश्तेदारों को प्रसव से पहले बताते हैं कि बच्चे के रोने का हमेशा यह मतलब नहीं होता कि वह भूखा है। अगर कोई बच्चा भूखा है तो आपको उसके हावभाव देखने चाहिए जैसे कि वह अपने हाथों को मुंह के अंदर लेकर जाता है। दूसरी अन्य चीजों को अपने मुंह में डालने की कोशिश करता है।

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