इस्पात स्लैग से बनाई 6 लेन की सडक

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गुजरात में इस्पात मंत्री ने किया उद्घाटन


जयपुर.
केंद्रीय इस्पात मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह ने गुजरात के सूरत में शहर के साथ पत्तन को जोडऩे के लिए इस्पात स्लैग (धातु की तलछट या मैल) के उपयोग से निर्मित पहली छह लेन वाली राजमार्ग सडक़ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मंत्री ने सभी अपशिष्ट को संपत्ति में परिवर्तित करके सर्कुलर (चक्रीय) अर्थव्यवस्था और संसाधन दक्षता को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने 15 अगस्त 2021 को दिए गए प्रधानमंत्री के भाषण को याद किया। मंत्री सिंह ने चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की जरूरत का विशेष उल्लेख कियाए क्योंकि विश्व में सभी प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों की कमी हो रही है। ऐसी स्थिति में चक्रीय अर्थव्यवस्था समय की मांग है और इसे हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बनाने की जरूरत है। इस्पात प्रसंस्करित स्लैग के 100 फीसदी उपयोग से निर्मित सडक़ अपशिष्ट को संपत्ति में बदलने और इस्पात संयंत्रों की स्थिरता में सुधार का एक वास्तविक उदाहरण है। सडक़ निर्माण में ऐसी सामग्री के उपयोग से न केवल टिकाऊपन बढ़ेगा बल्कि निर्माण की लागत को कम करने में भी सहायता मिलेगी क्योंकि स्लैग आधारित सामग्री में प्राकृतिक घटकों की तुलना में बेहतर विशेषताएं होती हैं। उन्होंने कहा कि इससे प्राप्त अनुभव का उपयोग सडक़ निर्माण में इस्पात स्लैग के व्यापक इस्तेमाल के लिए विस्तृत दिशा निर्देश विकसित करने में किया जाएगा।
इस्पात मंत्री ने आगे कहा कि उनका मंत्रालय सडक़ निर्माण, कृषि में मिट्टी के पोषक तत्वों व उर्वरकों के प्रतिस्थापन, रेलवे के लिए गिट्टी रोड़ा और हरित सीमेंट बनाने के लिए ऐसी सामग्री का उपयोग करने को लेकर अन्य सभी विकल्पों की तलाश कर रहा है। इस्पात मंत्रालय ने पहले ही इस्पात विनिर्माण के दौरान प्राप्त विभिन्न प्रकार के स्लैग के उपयोग के लिए कई अनुसंधान व विकास परियोजनाएं स्वीकृत की हैं और जिनमें से अधिकांश को एक दायित्व के रूप में देखा जा रहा है। इस्पात स्लैग का उपयोग करके सडक़ का निर्माण करना अन्य प्रमुख इस्पात कंपनियों के साथ अनुसंधान व विकास परियोजना का भी हिस्सा है जो मंत्रालय की ओर से प्रायोजित है।
चूंकि देश में विभिन्न प्रक्रियागत साधनों से इस्पात स्लैग का उत्पादन अभी से 2030 तक बढऩे की संभावना है। इसे देखते हुए सडक़ निर्माण में इस्पात स्लैग का उपयोग से देश में प्राकृतिक घटकों की कमी दूर हो सकेगी।

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