कलश यात्रा के साथ सांगानेर में 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ शुरू

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पं. श्रीराम शर्मा आचार्य लिखित ग्रंथों को सिर पर रखकर निकाली सद्ग्रंथ यात्रा

जयपुर, 30 दिसंबर। चालो चालो सुहागन नार कलश सिर धारण करो गीत की स्वर लहरियों और हम गायत्री मां के बेटे तुम्हें जगाने आए हंैं, हम बदलेंगे युग बदलेगा-हम सुधरेंगे युग सुधरेगा का उद्षोष…जहां तक नजर जाए वहां तक पीत आभा बिखेरती मातृ शक्ति….।
यह नजारा था गुरुवार को प्रतापनगर सांगानेर के कुंभा मार्ग सेक्टर 86 स्थित संत शुकदेव पार्क में आयोजित 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ से पूर्व निकली कलश और सद्ग्रंथ यात्रा का। गाजे-बाजे के साथ निकली कलश और सद्ग्रंथ यात्रा से कुंभा मार्ग गायत्रीमय हो उठा।
अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में यज्ञ से पूर्व सिद्धेश्वर महादेव मंदिर से निकली कलश यात्रा में जहां महिलाएं सिर पर मांगलिक कलश लेकर चल रही थीं। वहीं युवा शक्ति हाथों में धर्म ध्वजा थामे और जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। एक दर्जन से अधिक श्रद्धालु गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा द्वारा लिखित चयनित ग्रंथों को सिर पर लेकर चल रहे थे। जगह-जगह कलश यात्रा और सद्ग्रंथ यात्रा का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। महिलाएं आओ आओ सुहागन नार कलश धारण करो, थारो सुहाग अमर हो जाए… जैसे मांगलिक गीत गाती चल रही थी। वहीं युवा हम बदलेंगे युग बदलेगा, हम सुधरेंगे युग सुधरेगा जय घोष का उद्घोष करते हुए चल रहे थे।
विभिन्न मार्गों से होते हुए कलश एवं सद्ग्रंथ यात्रा आयोजन स्थल शुकदेव पार्क पहुंची। यहां कलशों और सद्ग्रंथों का पूजन-अर्चन कर गायत्री माता की आरती उतारी।

विचार शक्ति से आएगा बदलाव

शांतिकुंज हरिद्वार से आए टोली नायक सुनील शर्मा ने कहा कि युग बदल रहा है, इसलिए हमें भी बदल जाना चाहिए। जो नहीं बदलेंगे उन्हें महाकाल बदल देंगे। उन्होंंने कहा कि जीवन की दशा और दिशा बदलने वाले ग्रंथों को पुस्तकालयों में सजाने की नहीं वरन् घर-घर में प्रतिष्ठित करने की आवश्यकता है। क्योंकि ग्रंथों की विचार शक्ति से ही दुनिया की बुराई को अच्छाई में बदला जा सकता है। इसलिए श्रेष्ठ ग्रंथों को अपने घर में रखना चाहिए और प्रतिदिन स्वाध्याय करना चाहिए। संजय सिंह ने प्रज्ञागीतों से माहौल को भक्तिमय बना दिया।

देव पूजन-गाायत्री हवन आज से

व्यवस्थापक रणवीर सिंह चौधरी ने बताया कि 31 दिसंबर को सुबह छह से साढ़े सात बजे तक शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सामूहिक जप, ध्यान, प्रज्ञायोग और प्राणायाम करवाए जाएंगे। सुबह साढ़े आठ से साढ़े ग्यारह बजे तक देव पूजन के साथ गायत्री महायज्ञ शुरू होगा। शाम छह से रात्रि आठ बजे तक सर्व सुलभ गायत्री साधना पर संगीत और प्रवचन होंगे। नए साल के पहले दिन एक जनवरी को सुबह साढ़े आठ से साढ़े ग्यारह बजे तक गायत्री महायज्ञ के साथ पुसंवन, नामकरण, विद्यारंभ, दीक्षा, यज्ञोपवीत, जन्म दिवस सहित विविध संस्कार करवाए जाएंगे। शाम छह से रात्रि आठ बजे तक सद्ग्रंथ स्थापना दीपयज्ञ, संगीत और प्रवचन का कार्यक्रम होगा। दो जनवरी को सुबह छह से साढ़े सात बजे तक शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सामूहिक जप, ध्यान, प्रज्ञायोग और प्राणायाम और सुबह साढ़े आठ से साढ़े ग्यारह बजे तक गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति होगी।

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