स्थगित की जाए दलहन की स्टॉक जांच

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मंडी व्यापारियों ने मुख्यमंत्री गहलोत को भेजा ज्ञापन


जयपुर.
मंडी व्यापारियों ने कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए दलहन स्टॉक जांच स्थगित किए जाने की मांग की है। बीकानेर कच्ची आड़त व्यापार संघ ने इसके लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखा है।
संघ के संरक्षक एवं पूर्व अध्यक्ष मोतीलाल सेठिया और महामंत्री नंदकिशोर राठी ने इस पत्र में दाल दलहन के व्यापारियों, डीलरों, मीलर के पास उपलब्ध स्टॉक की घोषणा एवं कीमत वृद्धि के संबंध में पर्यवेक्षण के आदेश को स्थगित करने की मांग की है। इस पत्र में लिखा गया है कि वर्तमान में महामारी के कारण व्यापारी, मुनीम, गुमास्ता, स्टॉफ आदि अति आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकल कर कार्य करते है। ऐसे में राजस्थान खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से जारी आदेश डीएसओ से प्रमाणितशुदा स्टॉक रजिस्टर प्रतिदिन निर्धारित प्रपत्र में संधारण किया जाना तथा प्रत्येक माह में साप्ताहिक रिटर्न निर्धारित प्रपत्र में संबंधित डीएसओ को देना अंसभव है।
वर्तमान में संपूर्ण राजस्थान में लॉकडाउन लागू है। ऐसी स्थिति में स्टेशनरी की दुकानें नहीं खुलती है। उनके पास भी डीएसओ रजिस्टर उपलब्ध नहीं है। प्रिटिंग प्रेसे बंद पड़ी हुई है। अत: सरकार अविलंब इस आदेश को वापस लेने की कृपा करें। एक तरफ दोनों सरकारे किसानों को उनकी उपज का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर दिलाना चाहती है दूसरी तरफ इस तरह के आदेश निकालकर बाजार को मंदा करती है। वर्तमान में मूंग न्यूनतम समर्थन मूल्य से करीबन 1000 रूपए मंदा बिक रहा है तथा चना 200 रूपए मंदा बिक रहा है। इसका सीधा खामियाजा किसानों को उठाना पड़ रहा है।
वर्तमान में प्रदेश का प्रत्येक नागरिक इस महामारी से निबटने में अपना सहयोग दे रहा है। बीकानेर का व्यापारी वर्ग भी अलग अलग संस्थाओं के माध्यम से भोजन, दवाइयों, ऑक्सीजन आदि की व्यवस्था में सहयोग कर रहा है। अनाज व्यापारी अपने जान जोखिम में डालकर भी सरकार की ओर से जारी निर्देशों की पालना करते हुए आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति तथा किसानों से उनकी उपज खरीद कर भुगतान कर रहे है। ऐसी विषम परिस्थितियों में सरकार इंस्पेक्टर राज लागू करती है तो मजबूर होकर व्यापारी वर्ग को सडक़ों पर उतरना होगा।
दालों की तय दरों से ज्यादा कीमत ली गई तो डीएसओ कार्रवाई करेंगे। वर्तमान में किसी भी दाल का अधिकतम खुदरा मूल्य तय नहीं है। साबुत दालों के न्यूनतम समर्थन मूल्य तय है लेकिन अधिकतम मूल्य किसी भी तरह का तय नहीं है। इस प्रकार के आदेश से व्यापारियों में भय उत्पन्न किया जा रहा है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। हमारी राज्य सरकार केंद्र सरकार से पूछे कि क्या आपने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए है। क्या फिर राज्य सरकारों को आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू करने का कहना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

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