महिलाओं की मांग के सिंदूर में छुपा है सेहत का राज

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हिंदू धर्म में विवाहित महिलाएं मांग में सिंदूर लगाती हैं। यह प्रथा हिंदू धर्म में सदियों से चली आ रही है। लेकिन आधुनिक युग में काफी संख्या में उच्च शिक्षित महिलाएं इसे पुरातन पंथी विचारधारा मानते हुए मांग में सिंदूर नहीं लगाती हैं। इसके पीछे उनका तर्क है कि जब पुरुष मांग में सिंदूर नहीं लगाते हैं तो महिलाएं क्यों लगाएं।
हिंदू धर्म में हर प्रथा के पीछे कोई ना कोई वैज्ञानिक कारण होता है, ऐसा ही इस प्रथा के पीछे भी है, जिसे विज्ञान भी मानती है। कई रिसर्च से यह पता चला है कि मांग में सिंदूर भरने से अनिद्रा व तनाव दूर होता है। साथ ही इसके अन्य कई फायदे भी है।

शादीशुदा महिला की पहचान है सिंदूर

हिंदू धर्म में शादीशुदा महिला की पहचान माना जाता है एक चुटकी सिंदूर। हिंदू धर्म में सात फेरों का बंधन तब ही संपूर्ण होता है, जब महिला की मांग में विवाह के दौरान उसके पति द्वारा सिंदूर भरने की परंपरा का निर्वाह किया जाता है। इस रस्म के बिना विवाह को संपूर्ण नहीं माना जाता है। हिंदू धर्म में विवाहित महिला के लिए १६ शृंगार जरूरी माने गए हैं। उनमें भी सिंदूर को शामिल किया गया है।

तनाव दूर करता है सिंदूर

कई वैज्ञानिकों में भी सिंदूर के फायदों की पुष्टि की जा चुकी है। विवाह के बाद महिलाओं पर परिवार व बच्चों की जिम्मेदारियों के साथ अन्य कई जगह तालमेल बिठाकर चलना पड़ता है। ऐसे में कई बार उन्हें तनाव का भी सामना करना पड़ता है। काफी समय तक तनाव से महिलाओं को सिर दर्द, अनिद्रा, बेचैनी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है। ऐसे में महिलाओं को सिंदूर लगाने की सलाह दी जाती है। सिंदूर में पारा धातु होती है, जो एक तरल पदार्थ होता है। पारा मस्तिष्क को ठंडा रख तनाव दूर करता है। पारा रक्त संचार को सुचारू करने के साथ यौन क्षमताओं को भी बढ़ाने का काम करता है। सिंदूर में पारा होने से चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पड़ती।
इन सबके अलावा हिंदू धर्म में मान्यता है कि सिंदूर लगाने से देवी पार्वती अखंड सौभागयवती होने का आशीर्वाद देती हैं।

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