देशभक्ति के लिए दर्द होना जरूरी- दीपक खैरे

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निंबार्क पीठ में चल रहा है युवा प्रशिक्षण शिविर

हम जिस क्षेत्र से संबंधित होते हैं, उसकी पहचान हमारे साथ जुड़ी होती है। यदि हम विदेश में भी हैं तो भारतीयता हमारी पहचान होती है। अपने देश के लिए दर्द होना इसलिए आवश्यक है क्योंकि देशभक्ति से न केवल बड़े से बड़े काम सध जाते हैं अपितु देश का भविष्य भी हमसे जुड़ा हुआ होता है। जब तक युवा अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित नहीं कर लेता तब तक वह अपने जीवन को उद्देश्य पूर्ण नहीं बना सकता।
यह विचार विवेकानंद केंद्र के जीवनव्रती कार्यकर्ता दीपक खैरे ने निंबार्क पीठ में चल रहे युवा प्रशिक्षण शिविर के दौरान राष्ट्रभक्त संन्यासी स्वामी विवेकानंद के सत्र के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका में भारत की स्थिति का वर्णन करते हुए जिन पत्रों में आल्हा सिंगा पेरूमल को अपने मन की पीड़ा का वर्णन किया है, उन पत्रों के आधार पर समझा जा सकता है कि भारत का भविष्य केवल युवा पीढ़ी के हाथ में है।

भारत विश्व का नीति नियंता- श्वेता

शिविर के दूसरे सत्र में विवेकानंद केंद्र की विभाग संघटक श्वेता टकलकर ने बताया कि प्रत्येक राष्ट्र की एक नियति तय होती है किंतु भारत वह देश है जो विश्व का नीति नियंता है। भारत की भूमि तपोभूमि, त्याग भूमि, कर्मभमि एवं धर्म भूमि है।
शिविर प्रमुख दिवस गौड़ ने बताया की प्रतिदिन की दिनचर्या में प्रातकाल केंद्र वर्ग का आयोजन हुआ, जिसमें युवाओं ने योगाभ्यास, सूर्य नमस्कार एवं आसनों का अभ्यास किया। अपराह्न प्रेरणा सत्र में विवेकानंद केंद्र के वानप्रस्थ कार्यकर्ता अशोक खंडेलवाल एवं चंद्र प्रकाश अरोड़ा का युवाओं के समक्ष साक्षात्कार हुआ, जिसमें उन्होंने अपने जीवन के संघर्ष एवं सेवा कार्यों के अनुभव साझा किए। साक्षात्कार का संचालन प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख डा. स्वतंत्र शर्मा ने किया ।
सायंकालीन संस्कार वर्ग में सुरंग दौड़, विजयपथ एवं चरण स्पर्श खेल खिलाए गए। प्रांत संगठन प्रांजलि येरीकर ने बताया कि इस शिविर की थीम भारत के शहीदों पर रखी गई है। 23 मार्च को शहीदी दिवस के अवसर पर इस शिविर का समापन होगा।

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