गायब हो जाएंगे रेलवे से डीजल इंजन

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रेलवे का 2023 तक है शत प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य

जयपुर। एक समय था जब रेलवे के इंजन कोयले से चलते थे, लेकिन बदलती तकनीक और प्रदूषण के कारण करीब 14-15 साल पहले इनको हटा दिया गया। इसके बाद अधिकतर ट्रेन डीजल इंजन से ही चलन लगी। देश के कुछ हिस्सों में ट्रेन विद्युत इंजन से चलती थी, लेकिन अधिकतर हिस्सा विद्युतीकरण से अछूता रहा।
अब रेलवे ने युद्धस्तर पर पर ट्रेक विद्युतीकरण का अभियान छेड़ रखा है। इसके साथ वर्ष 2023 तक का लक्ष्य रखा है ताकि पूर्ण विद्युतीकरण किया जा सके। इससे अगले तीन साल बाद डीजल इंजन रेलवे ट्रेक पर देखने को नहीं मिलेंगे। सारी ट्रेन विद्युत इंजन से ही दौड़ेगी।

गत वर्ष 6000 किलोमीटर विद्युतीकरण

रेलवे की ओर से साल 2020-2021 में 6015 किलोमीटर रेलवे ट्रेक का विद्युतीकरण किया है। इससे पहले 2018-19 में भी रेलवे ने 5276 ट्रेक का विद्युतीकरण किया था। भारतीय रेल का वर्तमान ब्राडगेज नेटवर्क लगभग 64 हजार किलोमीटर है। इसमे से लगभग साढ़े पैंतालीस हजार किलोमीटर ट्रेक का विद्युुृतीकरण किया जा चुका है। बाकी बचे रेलवे ट्रेक को 2023 तक पूरी तरह से विद्युतीकरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए रेलवे पूरी तरह से मिशन मोड में काम कर रही है। इससे भविष्य में रेलयात्रियों का आवागमन का समय कम होगा।

प्रदूषण में आएगी कमी

देश में रेलवे ट्रेक का शत प्रतिशत विद्युतीकरण होने से रेलवे ट्रेक के आस-पास होने वाले प्रदूषण में काफी कमी आएगी। डीजल इंजनों से निकलने वाला धुंआ बंद होने से रेलयात्रियों को भी राहत मिलेगी। इसके साथ ही रेलवे की डीजल पर निर्भरता काफी घट जाएगी और सैंकड़ों करोड़ रूपए की बचत भी होगी। विद्युत रेलवे इंजन से ट्रेन का संचालन डीजल इंजन की तुलना में सस्ता पड़ता है।

क्या होगा इंजनों का


जब डीजल इंजन उपयोगी नहीं रहेंगे तो सवाल यह रहेगा कि इनका क्या होगा। वर्तमान में सैंकड़ों डीजल इंजन काम में लिए जा रहे है। इनमे से कुछ इंजनों को विद्युत इंजनों में बदला जाएगा और कुछ इंजनों को विदेशों में निर्यात कर दिया जाएगा।

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