कहीं आप भी ज्यादा तो नहीं हंसते

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सुमन शर्मा

जयपुर। कई बार व्यक्ति कुछ देर के लिए काफी खुश हो जाता है तो अगले ही पल दुखी। अगर आप भी हर दो मिनट में खुश हो जाते हैं और फिर अचानक दुखी हो जाते हैं तो सचेत हो जाइए। यह एक मानसिक बीमारी बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण हैं। बाइपोलर ऐसी मानसिक बीमारी है, जिसमें दिल और दिमाग या तो बहुत उदास रहता है या तो बहुत ही ज्यादा खुश रहता है।

100 में से एक व्यक्ति को होती है यह बीमारी

मनोचिकित्सकों का कहना है कि यह बीमारी 100 लोगों में से एक आदमी को होती है। इस बीमारी के शुरुआती लक्षण 19 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में अधिक देखने को मिलते हैं। यह बीमारी पुरुष तथा महिलाएं दोनों को हो सकती है। हालांकि कई अध्ययनों के अनुसार इस बीमारी से पुरुष 60 प्रतिशत और महिलाएं 40 प्रतिशत प्रभावित होती हैं। यह बीमारी 40 साल के ऊपर के लोगों में कम होती है।

सर्वे में आए चौंकाने वाले आंकड़े


कुछ साल पहले देश में पहली बार स्वास्थ्य विभाग की ओर से करीब 35 हजार लोगों को सम्मिलित कर राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया गया। इसमें 0.3 प्रतिशत लोग इस बाइलोपर डिसऑर्डर से पीड़ित पाए गए। इस सर्वेक्षण में जो आंकड़े आए थे चौंकाने वाले थे। देश में करीब 0.3 प्रतिशत यानी 1000 में से 3 लोग इससे पीड़ित हैं। इस बीमारी में कई कारणों से लगभग 70 प्रतिशत लोगों का इलाज नहीं हो पाता है। कई लोगों को तो पता चलता ही नहीं है कि उन्हें कोई बीमारी भी हो गई है। कई लोग इसे सामान्य मानते हैं, जिस वजह से मरीज का इलाज नहीं हो पाता है।

रोने का भी होता है मन


इस बीमारी में मरीज के मन में अत्यधिक उदासी, कार्य में अरुचि, चिड़चिड़ापन, घबराहट, आत्मग्लानि, भविष्य के बारे में निराशा, शरीर में ऊर्जा की कमी, अपने आप से नफरत, नींद की कमी, सेक्स इच्छा की कमी, मन में रोने की इच्छा, आत्मविश्वास की कमी लगातार बनी रहती है। आदमी के मन में आत्महत्या के विचार आते रहते हैं। मरीज की कार्य करने की क्षमता अत्यधिक कम हो जाती है। कभी-कभी मरीज का घर से बाहर निकलने का मन नहीं करता है। किसी से बातचीत करने का मन भी नहीं करता है। इस प्रकार की उदासी जब दो हफ्तों से अधिक रहे तब इसे बीमारी समझकर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

महंगा नहीं है इस बीमारी का इलाज

मनोचिकित्सकों के अनुसार का इस बीमारी का बहुत ही सफल इलाज मौजूद है, जो ज्यादा महंगा भी नहीं होता है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को दवाएं बिना डाक्टर के पूछे बन्द नहीं करनी चाहिए, चाहे इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति में किसी तरह के लक्षण नहीं रहे हों। ये कोई भूत प्रेत या झाड़ फूंक वाली समस्या नहीं है। यह एक मानसिक रोग है, जो किसी को भी हो सकता है। इसका समय पर उपचार करा लेना ही बेहतर रहता है।

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