आज तक कोई नहीं जान पाया इस मंदिर में आग लगने का रहस्य

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हमारे देश में बहुत से ऐसे मंदिर हैं, जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे कि इस विज्ञान के युग में ऐसा भी हो सकता है क्या। ऐसा ही एक मंदिर है उदयपुर जिला मुख्यालय से 60 किमी दूर स्थित गांव बम्बोरा में इडाणा देवी का। लोगों के अनुसार यहां देवी महीने में दो-तीन बार अग्नि स्नान करती हैं। यहां आस-पास के लोगों द्वारा बताया जाता है कि हजारों साल पुरानी शक्तिपीठ इडाणा माता मंदिर में अग्निस्नान की परम्परा है। यहां कभी भी आग लग जाती है और अपने आप बुझ जाती है। इस मंदिर का नाम इडाणा उदयपुर मेवल की महारानी के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

प्रतिमा को नहीं होता कोई नुकसान

कहा जाता हैं कि जब देवी मां पर चुनरी, लच्छा, नारियल का भार बढ़ जाता है तो वे स्वयं अग्निस्नान कर भक्तों को अपने अलौकिक स्वरूप का दर्शन देती हैं। इडाणा माता मंदिर के सेवक बताते हैं कि अचंभित करने वाली बात यह है कि अग्निस्नान के दौरान मंदिर में रखा पूरा सामान जल जाता है, लेकिन मंदिर में माता की प्रतिमा और उस पर एक चुनरी आग में भी सही सलामत रहती है। इस दौरान करीब 10-12 फीट ऊंची लपटें उठती हैं। मंदिर में आग कैसे लगती है और कैसे बुझती है, यह कोई नहीं जानता। इस मंदिर के ऊपर कोई छत नहीं है और यह प्रतिमा एक खुले चौक में है।

राजघराने की हैं कुलदेवी

इडाणा माता को स्थानीय राजघराने अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते आए है। माता के इस मंदिर में श्रद्धालु चढ़ावे में लच्छा चुनरी और त्रिशूल लाते हैं। मंदिर में कोई पुजारी नहीं है। यहां सभी लोग देवी मां के सेवक हैं। यहां सभी धर्मों के लोग आते हैं।
माता के मंदिर में लकवे का इलाज भी होता है। कहते हैं कि अगर कोई लकवाग्रस्त व्यक्ति यहां आता है तो वह स्वस्थ्य होकर लौटता है। देवी इडाणा मां का यह मंदिर अलौकिक अग्निस्नान के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है।

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